अयोध्या में संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति की भव्य रामलीला का शुभारंभ
- नारद मोह और रावण जन्म प्रसंग के मंचन से भक्त भावविभोर
अचल वार्ता,अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति द्वारा आयोजित पौराणिक एवं ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ श्री भगवदाचार्य स्मारक सदन में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन करते हुए समिति के अध्यक्ष विंदुगद्याचार्य श्रीमहंत देवेंद्रप्रसादाचार्य महाराज ने कहा कि रामलीला न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि जीवन को धर्म, सत्य और आदर्शों की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।
इस अवसर पर मंच पर धार्मिक जगत के कई प्रमुख संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। रामलीला समिति के महामंत्री स्वामी श्री संजय दास महाराज, कोषाध्यक्ष स्वामी श्री अवधेश कुमार दास महाराज, उपाध्यक्ष महंत जनार्दन दास महाराज, डॉ. महेश दास महाराज, अंतरराष्ट्रीय पहलवान महंत राजेश दास महाराज, महंत सत्यदेव दास महाराज, महासचिव निर्वाणी अनी, व्यास सरोज दास महाराज, महंत दामोदर दास महाराज (खाक चौक), नागा राम लखन दास महाराज, आचार्य मुकेश दास महाराज, और श्री अभिषेक मिश्र सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं वरिष्ठ गणमान्यजन उपस्थित रहे।
नारद मोह और रावण जन्म प्रसंग का दिव्य मंचन
रामलीला के पहले दिन मंचन में “नारद मोह” और “रावण जन्म” जैसे पौराणिक और ऐतिहासिक प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और भव्य वेशभूषा से ऐसा दिव्य वातावरण प्रस्तुत किया कि दर्शक भावविभोर हो उठे।
नारद मोह” प्रसंग में देवर्षि नारद की तपस्या और मोह का दृश्य अत्यंत शिक्षाप्रद रूप में दिखाया गया
वहीं “रावण जन्म” प्रसंग में राक्षसराज रावण के जन्म का चित्रण करते हुए दर्शकों को यह संदेश दिया गया कि अहंकार और अधर्म अंततः विनाश की ओर ले जाता है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति रस का संचार
रामलीला के शुभारंभ को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय नागरिक उपस्थित हुए। जैसे ही मंचन आरंभ हुआ, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और जयश्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कहा कि अयोध्या में आयोजित यह रामलीला भक्ति, संस्कृति और आस्था का अनूठा संगम है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में रामलीला मंचन में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े अन्य प्रेरणादायक प्रसंग भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
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