सरकारी राशन की दुकानों पर अब नहीं होगी हेराफेरी: ब्लूटूथ से जुड़ेंगी ई-पोस मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे, 10 ग्राम की चोरी भी पकड़ी जाएगी
भीनमाल-जालोर में सरकारी राशन दुकानों पर ब्लूटूथ से जुड़ेंगी ई-पोस मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे, 10 ग्राम की हेराफेरी भी पकड़ी जाएगी, फरवरी से नई व्यवस्था लागू।
भीनमाल, अचल वार्ता। सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और कम वजन की शिकायतों पर पूर्ण विराम लगाने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। अब राशन दुकानों पर रखी जाने वाली ई-पोस मशीनों को इलेक्ट्रॉनिक तराजू से ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे तौल में किसी भी प्रकार की हेराफेरी संभव नहीं होगी।
जालोर जिले में 2.62 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ
इस नई व्यवस्था के तहत जालोर जिले में खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े 2,62,715 राशन कार्डधारी परिवार लाभान्वित होंगे। वहीं भीनमाल उपखंड में 21,048 परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
जिले में प्रतिमाह लगभग 5,999 मीट्रिक टन गेहूं का वितरण किया जाता है।
ब्लूटूथ तकनीक से जुड़ेंगी पोस मशीन और कांटे
नई प्रणाली के तहत राशन दुकानों पर मौजूद ई-पोस मशीन और गेहूं तौलने वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटे (तराजू) को ब्लूटूथ से आपस में जोड़ा गया है।
अब दुकानदार चाहकर भी वजन में हेराफेरी नहीं कर सकेगा, क्योंकि 10 या 20 ग्राम की कमी भी सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा।
वजन पूरा होने पर ही निकलेगी रसीद
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब तक तराजू पर पूरा निर्धारित वजन नहीं होगा, तब तक ई-पोस मशीन से रसीद (पर्ची) नहीं निकलेगी।
उदाहरण के तौर पर यदि उपभोक्ता के हिस्से में 10 किलो गेहूं है, तो तराजू पर पूरा 10 किलो वजन होने के बाद ही मशीन “OK” संकेत देगी और पर्ची प्रिंट होगी।
इससे उपभोक्ताओं को पूरी संतुष्टि रहेगी कि पर्ची में दर्ज मात्रा के अनुसार ही उन्हें गेहूं प्राप्त हुआ है।
फरवरी से लागू होगा नया मॉडल
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा यह नई व्यवस्था फरवरी माह से गेहूं वितरण में लागू की जा रही है। इसके साथ ही जिले की सभी राशन दुकानों की जियो-टैगिंग भी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे निगरानी और अधिक प्रभावी हो सकेगी।
राशन डीलरों ने जताई चिंता
प्रदेश प्रवक्ता वरदाराम देवासी ने बताया कि विभाग द्वारा यह नई प्रणाली बिना पूर्व सूचना के लागू की गई है। इससे वितरण में पारदर्शिता तो आएगी, लेकिन व्यावहारिक समस्याएं भी उत्पन्न होंगी।
उन्होंने कहा कि—
- एक राशन कार्ड पर वितरण में 25 से 30 मिनट तक का समय लग सकता है
- कई दुकानों का संचालन अस्थायी रूप से हो रहा है, जहां एक ही डीलर के पास दो दुकानें हैं
- नई व्यवस्था में गेहूं वितरण करना डीलरों के लिए कठिन साबित हो सकता है
- उपभोक्ताओं को होगा सबसे बड़ा फायदा
हालांकि नई तकनीक के लागू होने से उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। अब राशन वितरण में कम वजन, गड़बड़ी और शिकायतों की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही मात्रा में पात्रों तक पहुंचेगा।
- ब्यूरो रिपोर्ट
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