मोदरान में भक्ति का सैलाब: 200 साल पुराने श्री ठाकुरजी मंदिर का जीर्णोद्धार, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नवीन मंदिर में प्रतिमा प्रतिष्ठित

मोदरान (जालौर) में 200 साल पुराने श्री ठाकुरजी मंदिर का जीर्णोद्धार, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नवीन मंदिर में प्रतिमा प्रतिष्ठित, भजन संध्या व रात्रि जागरण में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।

Feb 15, 2026 - 20:44
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मोदरान में भक्ति का सैलाब: 200 साल पुराने श्री ठाकुरजी मंदिर का जीर्णोद्धार, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नवीन मंदिर में प्रतिमा प्रतिष्ठित

मोदरान, जालौर, अचल वार्ता। जालौर जिले के मोदरान ग्राम में रविवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ग्राम स्थित लगभग 200 वर्ष प्राचीन श्री ठाकुरजी भगवान मंदिर के जीर्णोद्धार के संकल्प के साथ भगवान की प्रतिमा को पूर्ण वैदिक विधि-विधान से नवीन लघु मंदिर में विधिवत रूप से प्रतिष्ठित किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुआ अनुष्ठान

इस पावन समारोह का मुख्य आकर्षण पंडित दिनेश भट्ट के सानिध्य में आयोजित वैदिक अनुष्ठान रहा। वेद मंत्रों के गूंजते स्वर और धार्मिक क्रियाकलापों के बीच, समस्त ग्रामवासियों की उपस्थिति में भगवान ठाकुरजी की प्रतिमा को पुराने मंदिर से नवीन लघु मंदिर में विराजमान किया गया।

रविवार को अभिजित मुहूर्त के शुभ समय में प्रतिमा स्थापना संपन्न हुई।

200 वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है मंदिर

ग्रामीणों के अनुसार श्री ठाकुरजी का यह मंदिर लगभग दो शताब्दी पुराना है। समय के साथ मंदिर की संरचना जर्जर हो गई थी, जिसे देखते हुए ग्रामवासियों ने इसके भव्य जीर्णोद्धार का निर्णय लिया।

फिलहाल पुराने मंदिर के स्थान पर नए और भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। निर्माण पूर्ण होने तक भगवान ठाकुरजी नवीन लघु मंदिर में विराजमान रहेंगे और भक्तों को दर्शन देते रहेंगे।

भजन संध्या और रात्रि जागरण से बना भक्तिमय माहौल

महोत्सव की शुरुआत शनिवार रात्रि को भव्य भजन संध्या एवं रात्रि जागरण से हुई। ग्रामीणों ने अखंड ज्योति प्रज्वलित कर पूरी रात प्रभु का गुणगान किया।

रविवार सुबह महाआरती के पश्चात प्रतिमा प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने सहभागिता की।

सामूहिक सहयोग से सहेजी जा रही सांस्कृतिक विरासत

ग्रामीणों ने बताया कि इस पुनीत कार्य में मोदरान के प्रत्येक परिवार ने तन-मन-धन से सहयोग किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करने का सामूहिक प्रयास है।

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