बहराइच: दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा के दोषी ' सरफराज' को हुई फांसी व 9 को उम्रकैद की सजा, मूर्ति विसर्जन के दौरान 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की हुई थी हत्या

बहराइच में 2024 दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा में राम गोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी और 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। ट्रायल मात्र 13 महीने 26 दिन में पूरा हुआ।

Dec 11, 2025 - 18:52
Jan 18, 2026 - 10:50
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बहराइच: दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा के दोषी ' सरफराज' को हुई फांसी  व 9 को उम्रकैद की सजा,  मूर्ति विसर्जन के दौरान 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की हुई थी हत्या
दुर्गा पूजा विसर्जन हिंसा मामले में बहराइच कोर्ट का आया फैसला

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में आज बड़ा फैसला सुनाया गया।

अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि अन्य 9 दोषियों को आजीवन कारावास दिया गया है।

13 आरोपियों में से 10 दोषी, 3 बरी

बीते 9 दिसंबर को अदालत ने 13 में से 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि सबूतों के अभाव में खुर्शीद, शकील और अफजल को बरी कर दिया गया था।

दोषी ठहराए गए आरोपियों में — अब्दुल हमीद, फहीम, सरफराज, तालिब, सैफ, जावेद, जीशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ शामिल हैं। इनमें सरफराज को फांसी की सजा मिली है।

शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि सिर्फ 13 महीने 26 दिन में ट्रायल पूरा कर फैसला सुना दिया गया, जो तेज न्याय व्यवस्था का उदाहरण है।

कैसे भड़की थी हिंसा

यह घटना महसी थाना क्षेत्र के महराजगंज में हुई थी, जहां विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे पर बज रहे गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ।

जल्द ही विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और पथराव व फायरिंग शुरू हो गई। फायरिंग के दौरान राम गोपाल मिश्रा को गोली लगी, जिसके चलते उनकी मौत हो गई।

ट्रायल का पूरा क्रम

  • 11 जनवरी 2025 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की
  • 18 फरवरी को आरोप तय हुए
  • कुल 12 गवाहों की गवाही हुई
  • 21 नवंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया
  • आज दोषियों को सजा सुना दी गई

किन धाराओं में सजा हुई

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जिनमें प्रमुख हैं:

धारा 103(2) — मॉब लिंचिंग में हत्या (दंड: फांसी या आजीवन कारावास)

धारा 191(2), 191(3), 190, 109(2), 249, 61(2)

आर्म्स एक्ट की धारा 30

इन धाराओं में 2 वर्ष से लेकर मौत की सजा तक का प्रावधान है।

बरी हुए आरोपी और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया

जब तीन आरोपियों को बरी किया गया था, तब राम गोपाल मिश्रा की पत्नी रोली मिश्रा ने कहा था “मेरे पति के हत्यारों को फांसी दो, तभी न्याय मिलेगा। बरी किए गए तीनों भी दोषी हैं, उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए।” परिवार ने सभी दोषियों को मौत की सजा की मांग की है।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त

मामले में रासुका भी लगाई गई थी और घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि सांप्रदायिक सद्भाव बना रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

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