अल्मोड़ा में वन बहाली पर मंथन

अल्मोड़ा में RECAP4NDC परियोजना के तहत वन एवं वृक्ष आच्छादन बढ़ाने, भूमि क्षरण रोकने और आजीविका संवर्धन पर मंथन हुआ। धसपड़ ग्राम को पायलट साइट के रूप में चुना गया।

Apr 25, 2026 - 07:20
Apr 25, 2026 - 07:54
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अल्मोड़ा में वन बहाली पर मंथन

अल्मोड़ा, अचल वार्ता। जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना RECAP4NDC एवं “भारत में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के क्रियान्वयन हेतु वन एवं वृक्ष आच्छादन की बहाली, संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए वन परिदृश्य पुनर्स्थापन दृष्टिकोणों के कार्यान्वयन” के अंतर्गत संभावित विकास कार्यों को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला समन्वय समिति के सदस्यों, विषय विशेषज्ञों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा योजना के तकनीकी, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही वन एवं वृक्ष आच्छादन में वृद्धि, भूमि क्षरण की रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु समेकित एवं दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गयी। आईयूसीएन द्वारा उत्तराखंड राज्य में 30000+ हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए डीपीआर बनाई जा रही है। इस डीपीआर के तहत अल्मोड़ा में तीन क्लस्टरों धसपड़, नौगांव तथा चितई पंत को टॉप प्रायरिटी में रखा गया है। बैठक में जागेश्वर रेंज में स्थित धसपड़ ग्राम में पायलट साइट के रूप में कार्य शुरू करने पर सहमति बनी। जिलाधिकारी ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य वन संरक्षण तथा वनावरण को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को इस परियोजना के बारे में पूर्ण जानकारी देना सुनिश्चित किया जाए तथा उनके लाभ भी सुनिश्चित हों। साथ ही ग्राउंड पर कार्बन प्रोजेक्ट की फिजीबिलिटी चेक करने के भी निर्देश दिए । जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चयनित क्षेत्रों में आजीविका गतिविधियों की स्पष्ट एवं व्यावहारिक रूपरेखा तैयार की जाए, जिससे स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। उन्होंने सभी कार्यों को परिणाम आधारित बनाने तथा उनके प्रभाव का नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयास शामिल हैं। इसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों का आकलन, पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन, क्षमता विकास तथा सामाजिक-आर्थिक अध्ययन को अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए गए।

क्या है RECAP4NDC ?

यह एक भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना है, जो 2029 तक 4 लाख हेक्टेयर से अधिक निम्नीकृत वन परिदृश्य को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। GIZ द्वारा समर्थित यह परियोजना उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में FLR (Forest Landscape Restoration) के माध्यम से स्थानीय आजीविका सुधारने, जैव विविधता बढ़ाने और भारत के NDC लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता कर रही है। इस परियोजना के तहत उत्तराखंड में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, और पौड़ी गढ़वाल जैसे क्षेत्रों में वन बहाली (FLR) के लिए 30,000+ हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की गई है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी अल्मोड़ा प्रभाग दीपक सिंह, सिविल सोयम प्रभाग प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, परियोजना निदेशक डीआरडीए के एन तिवारी, सहित संबंधित विभागों के अधिकारी तथा RECAP4NDC परियोजना की राज्य सलाहकार अपर्णा पांडे, आईयूसीएन से दीपिका क्षेत्री, सम्मिलित संस्थाओं के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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