Factory Blast: सोनीपत में अवैध फैक्टरी में धमाका, 5 प्रवासी महिलाएं जिंदगी-मौत से जूझ रहीं
सोनीपत के बहालगढ़ में अवैध लाइटर फैक्टरी में धमाका, 5 प्रवासी महिलाएं गंभीर रूप से झुलसीं, 15 घंटे बाद भी FIR नहीं, प्रशासन पर उठे सवाल।
- सिस्टम की लापरवाही से भड़का ज्वालामुखी, 15 घंटे बाद भी FIR नहीं
सोनीपत, अचल वार्ता। हरियाणा के सोनीपत जिले के बहालगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव लिवासपुर के पास अवैध रूप से संचालित लाइटर तोड़ने की फैक्टरी में हुए भीषण धमाके ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है। हादसे में पांच प्रवासी महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं, जिन्हें बहालगढ़ स्थित रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वे जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही हैं।
छोटे कमरे में मौत का खेल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक छोटे से बंद कमरे में गैस भरे लाइटर तोड़े जा रहे थे। न कोई सुरक्षा उपकरण, न फायर सिस्टम और न ही फैक्टरी संचालन का कोई वैध लाइसेंस। अचानक हुए तेज धमाके से पूरा कमरा आग और धुएं से भर गया। चीख-पुकार मच गई और अंदर काम कर रहीं पांच महिलाएं आग की चपेट में फंस गईं।
बिहार की रहने वाली हैं घायल महिलाएं
धमाके में झुलसी महिलाओं की पहचान बिहार के छपरा निवासी शिवानी, रेनू, पिंकी, मंगोया और ममता के रूप में हुई है। सभी महिलाएं प्रवासी मजदूर थीं और रोजी-रोटी के लिए इस अवैध फैक्टरी में काम कर रही थीं। आसपास के लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
फैक्टरी मालिक फरार, प्रशासन मौन
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह अवैध फैक्टरी सोनीपत के पंकज नामक व्यक्ति की बताई जा रही है, जो हादसे के बाद से फरार है। दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, लेकिन सवाल यह है कि हादसे के करीब 15 घंटे बाद भी पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
सवालों के घेरे में पुलिस-प्रशासन
मीडिया द्वारा जब पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में सवाल किए गए तो अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आए। किसी ने भी स्पष्ट बयान देने से बचते हुए चुप्पी साध ली। यह स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है कि प्रशासन की नाक के नीचे यह अवैध फैक्टरी कब से चल रही थी। क्या पुलिस, श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी या जानबूझकर अनदेखी की गई।
हादसा नहीं, जवाबदेही का मामला
यह घटना सिर्फ एक औद्योगिक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। अब सवाल सिर्फ धमाके का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है कि इन पांच जली हुई जिंदगियों का जिम्मेदार आखिर कौन है।
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