अम्बेडकर नगर : देवहट तालाब की दुर्दशा पर ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
बसखारी/अम्बेडकरनगर। एक ओर सरकार जल संरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन और “जल है तो कल है” जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विकास खंड बसखारी की ग्राम पंचायत बेला परसा एवं देवहट स्थित ऐतिहासिक देवहट तालाब कथित जल माफियाओं और पट्टाधारकों की मनमानी का शिकार होता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में मछली पालन और कब्जेदारी की आड़ में लगातार रासायनिक दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे तालाब की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और जलचर जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। कभी कमल के फूलों, हरियाली, पक्षियों और स्वच्छ जल के लिए प्रसिद्ध देवहट तालाब आज बदहाली की तस्वीर बनता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय तालाबों में जल संरक्षण होना चाहिए, उसी समय कथित पट्टाधारक पम्पसेट, मोटर और ट्रैक्टरों की मदद से तालाब का पानी बाहर निकाल रहे हैं। आरोप है कि पानी निकासी का यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे तालाब सूखने की कगार पर पहुंच गया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक उदासीनता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो जल संरक्षण नहीं बल्कि “तालाब सुखाओ अभियान” चलाया जा रहा हो।
ग्रामीणों के अनुसार देवहट तालाब केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और पर्यावरणीय धरोहर है। तालाब के सूखने से न केवल पर्यावरण प्रभावित होगा बल्कि भूजल स्तर, पशु-पक्षियों और आसपास के किसानों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।
अब क्षेत्र में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन कथित जल माफियाओं पर कार्रवाई करेगा? क्या तालाब को बचाने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया जाएगा? या फिर सरकारी योजनाएं केवल कागजों और पोस्टरों तक ही सीमित रह जाएंगी?
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं और देवहट तालाब अपनी बदहाली के बीच संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है।
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