अल्मोड़ा : पत्रकारों से अभद्रता पर विधायक मनोज तिवारी का कड़ा रुख, सख्त कार्रवाई की मांग
अल्मोड़ा में पत्रकारों से कथित अभद्रता के मामले पर विधायक मनोज तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया। नर्सिंग कॉलेज संचालक पर सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और संस्थान की कार्यप्रणाली की गहन जांच की मांग की।
अल्मोड़ा , अचल वार्ता। नगर में एक प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज के संचालक द्वारा हाल ही में पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।इस घटना पर अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए गहरा रोष व्यक्त किया है और प्रशासन से तत्काल व सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस प्रकरण को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताते हुए इसे अत्यंत गंभीर बताया है।विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं और समाज के हर वर्ग की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता न केवल निंदनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति पत्रकारों की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है, उसके व्यवहार पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं कि वह आम जनता, विद्यार्थियों और संस्थान में कार्यरत शिक्षकों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित नर्सिंग इंस्टीट्यूट का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी इस संस्थान से जुड़े कई विवाद सामने आ चुके हैं, जो नैतिकता और अनुशासन के विपरीत रहे हैं। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि केवल इस घटना तक सीमित न रहते हुए पूरे संस्थान की कार्यप्रणाली, गतिविधियों और वास्तविक स्थिति की गहन जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
विधायक ने कहा कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो इससे गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा और समाज में गलत संदेश जाएगा।उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।इस पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकार संगठनों में भी रोष व्याप्त है। विधायक ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज में सच्चाई सामने लाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान समाज के लिए आदर्श होने चाहिए, जहां अनुशासन, सम्मान और नैतिकता का वातावरण हो। यदि ऐसे संस्थानों में ही इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।
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