अम्बेडकर नगर : डीएम का आगमन, उम्मीदों का मौसम… और शिकायत ने खोल दी सिस्टम की पोल
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जनपद में जैसे ही नवागत जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने कदम रखा, अखबारों की सुर्खियों में बड़े-बड़े अक्षरों में छपने लगा— “अब जिले में बदलाव आएगा, नारी सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी, व्यवस्था पटरी पर दौड़ेगी।” जनता ने भी सोचा कि चलो, अब शायद जिले की किस्मत का बल्ब जलने वाला है।
लोगों के मन में उम्मीद जगी कि अब जिले की शक्ल और सूरत दोनों बदलेंगी, शिकायतों पर न्याय होगा, और फाइलों की धूल झाड़कर जनता को राहत मिलेगी। मगर कहते हैं ना, उम्मीद जितनी बड़ी होती है, झटका भी उतना ही जोरदार लगता है।
एक शिकायत ने पूरे सिस्टम की ऐसी पोल खोली कि लोग हैरान रह गए। मामला स्पेशल कॉलेज से जुड़ा था। शिकायत पहुंची जिलाधिकारी कार्यालय, जांच हुई, और निस्तारण रिपोर्ट में लिख दिया गया— “कार्य गुणवत्ता पूर्ण किया जा रहा है।”
अब मजे की बात यह है कि ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही कहानी सुना रही है। जिले में शासनादेश को मानो छुट्टी पर भेज दिया गया हो और सैकड़ों शिकायतों का निस्तारण स्पेशल कॉलेज में बैठकर ऐसे किया जा रहा है, जैसे वहीं मिनी कलेक्ट्रेट खुल गया हो।
जनता पूछ रही है कि अगर हर शिकायत का इलाज स्पेशल कॉलेज में ही होना है, तो फिर बाकी दफ्तरों में कुर्सियां सिर्फ सजावट के लिए रखी गई हैं क्या?
डीएम के आगमन पर जो भरोसे का पौधा लगा था, वह अब सूखता नजर आ रहा है। लोग कह रहे हैं कि न्याय की उम्मीद थी, लेकिन जांच रिपोर्ट ने तो उम्मीदों का ही पोस्टमार्टम कर दिया।
फिलहाल जिले में चर्चा गर्म है कि अम्बेडकरनगर की सत्ता की यह कांटों भरी कुर्सी कब तक खेल दिखाएगी? और जनता इंतजार में है कि बदलाव आएगा… या सिर्फ हेडलाइन ही बदलती रहेगी।
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