भैरवगढ़ी मंदिर: आस्था, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम

पौड़ी गढ़वाल के कीर्तिखाल गांव स्थित भैरवगढ़ी मंदिर आस्था, ट्रैकिंग और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। काल भैरव को समर्पित यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

Apr 26, 2026 - 12:56
Apr 26, 2026 - 13:06
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पौड़ी गढ़वाल, अचल वार्ता । भैरवगढ़ी मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद में कीर्तिखाल गांव की सुरम्य पहाड़ियों में, लैंसडाउन के निकट स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए कीर्तिखाल से लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर का मनमोहक ट्रैक करना पड़ता है।

 यह ट्रैक घने जंगलों और खूबसूरत पहाड़ी दृश्यों से होकर गुजरता है, जहाँ से 360 डिग्री में आसपास की पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम होने के कारण यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है। भैरवगढ़ी मंदिर भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें गढ़वाल क्षेत्र का रक्षक और द्वारपाल माना जाता है।

 यहाँ काल नाथ भैरव देवता की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है, और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवता को काले रंग की वस्तुएँ प्रिय होती हैं, इसलिए प्रसाद के रूप में बाजरे के आटे (मंडुवा) का विशेष महत्व है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है, क्योंकि भैरवगढ़ को गढ़वाल के प्राचीन 52 गढ़ों में शामिल किया जाता है और इसे पहले लंगूर गढ़ के नाम से जाना जाता था। रोमांच और आस्था का संगम प्रस्तुत करने वाला यह स्थल विशेषकर मानसून के दौरान और भी आकर्षक हो जाता है, जब यहाँ से हिमालय की चोटियों और हरियाली से भरे प्राकृतिक दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखायी देते हैं।

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