राम नगरी अयोध्या में 15 KM के दायरे में मांस बिक्री पर प्रतिबंध, श्रद्धालु और संत समाज में खुशी
राम नगरी अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के अंतर्गत 15 किमी के दायरे में मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिला प्रशासन के फैसले से संत समाज और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है।
पंचकोसी परिक्रमा मार्ग में लागू हुआ फैसला, धार्मिक मर्यादाओं का होगा सख्त पालन
अयोध्या, अचल वार्ता। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में जिला प्रशासन ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राम नगरी अयोध्या में अब 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के अंतर्गत फूड विभाग और जिला प्रशासन द्वारा धार्मिक मर्यादाओं के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
प्रशासन के इस फैसले के बाद संत समाज, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर देखी जा रही है। साधु-संतों और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया है और इसे अयोध्या की धार्मिक गरिमा के अनुरूप बताया है।
विश्व हिंदू परिषद ने फैसले को बताया सराहनीय...
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में मांस बिक्री पर प्रतिबंध एक बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि पहले से ही कई प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे हरिद्वार और तिरुपति में मांस और शराब की बिक्री पर रोक है।
उन्होंने कहा, “अयोध्या एक पवित्र नगरी है, यहां शाकाहारी जीवनशैली का पालन होना चाहिए, यही उचित है।”
‘मांस बेचने वालों पर हो सख्त कार्रवाई’
संत विष्णु दास ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम की नगरी में मांस की बिक्री पर रोक लगाना एक उत्तम निर्णय है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु रामलला और बजरंगबली के दर्शन के लिए अयोध्या आते हैं, उनके लिए यह फैसला बेहद उपयुक्त है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी तीर्थ स्थलों पर मांस की बिक्री पर प्रतिबंध होना चाहिए, और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘अयोध्या की पवित्रता और बढ़ेगी’
संत देवेशाचार्य ने कहा कि अयोध्या मर्यादा और संस्कृति की नगरी है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और मांस की बिक्री देखकर उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती थीं।
उन्होंने कहा कि “इस फैसले से अयोध्या और अधिक पवित्र बनेगी।” साथ ही उन्होंने शासन-प्रशासन को इस निर्णय के लिए साधुवाद दिया और इसे संत समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम बताया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रतिबंध के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी और फूड विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जाएगी। इस फैसले को अयोध्या की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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