Supreme Court of India ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज की, तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में दोहरी जांच को मंजूरी

Supreme Court of India ने Subramanian Swamy की याचिका खारिज करते हुए तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में राज्य सरकार की प्रशासनिक जांच और SIT जांच को साथ-साथ चलने की अनुमति दी,मामला Tirumala Venkateswara Temple के प्रसाद में इस्तेमाल घी की कथित मिलावट से जुड़ा है, CBI और ED भी मामले की जांच कर रहे हैं।

Feb 23, 2026 - 18:58
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Supreme Court of India ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज की, तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में दोहरी जांच को मंजूरी

नई दिल्ली, अचल वार्ता 

Supreme Court of India ने सोमवार को भाजपा नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद Subramanian Swamy द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में Government of Andhra Pradesh द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति को चुनौती दी गई थी, जो तिरुमाला लड्डुओं में कथित मिलावटी घी सप्लाई मामले में विभागीय कार्रवाई तय करने के लिए बनाई गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्रशासनिक जांच और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित विशेष जांच दल (SIT) की आपराधिक जांच अलग-अलग दायरे में हैं। इसलिए दोनों जांच प्रक्रियाएं समानांतर रूप से जारी रह सकती हैं। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे।

क्या था मामला?

मामला Tirumala Venkateswara Temple में प्रसाद के रूप में वितरित होने वाले लड्डुओं में इस्तेमाल घी की कथित मिलावट से जुड़ा है। स्वामी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति की जांच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की जांच में हस्तक्षेप कर रही है।

हालांकि, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास हस्तक्षेप की मांग करने का पर्याप्त आधार नहीं है और अदालत की प्राथमिक चिंता केवल यह है कि दोनों जांच प्रक्रियाओं में टकराव न हो।

राज्य सरकार की समिति क्या करेगी?

3 फरवरी को मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस समिति के गठन का निर्णय लिया गया था।

समिति को 45 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसका दायरा केवल प्रशासनिक पहलुओं तक सीमित रहेगा। समिति यह जांच करेगी:

  • प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई
  • क्या निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए
  • किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है
  • क्या अनुशासनात्मक या विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए

SIT और CBI की कार्रवाई

इससे पहले 4 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच एक स्वतंत्र SIT को सौंपी थी, जो Central Bureau of Investigation के निदेशक की निगरानी में काम कर रही थी।

SIT ने 23 जनवरी 2026 को नेल्लोर स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो की अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है।

ED की एंट्री और हवाला का एंगल

मामले में Enforcement Directorate ने भी धन शोधन निवारण कानून के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने CBI की चार्जशीट के आधार पर अपनी कार्रवाई शुरू की है।

सूत्रों के अनुसार, जांच में हवाला के जरिए लेनदेन के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निजी डेयरी कंपनियों और बिचौलियों ने घी के टेंडर और गुणवत्ता मंजूरी से जुड़े TTD अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए हवाला चैनलों के माध्यम से रिश्वत पहुंचाई।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों प्रक्रियाएं कानून के अनुसार सख्ती से जारी रहेंगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच में किसी प्रकार का टकराव न हो।

सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि याचिका दुर्भावना से दायर की गई है ताकि विभागीय कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।

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