Narendra Modi की दूसरी इजरायल यात्रा, रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर; आयरन डोम तकनीक पर हो सकती है चर्चा
प्रधानमंत्री Narendra Modi की दूसरी इजरायल यात्रा में रक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी। Israel के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, अचल वार्ता
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इजरायल के लिए रवाना हो गए। यह उनके कार्यकाल की दूसरी इजरायल यात्रा है, जिसे दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार इस यात्रा के दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू स्वयं Ben Gurion Airport पर पीएम मोदी का स्वागत करेंगे। इसे कूटनीतिक प्रोटोकॉल से हटकर विशेष सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 2017 की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भी नेतन्याहू ने व्यक्तिगत रूप से एयरपोर्ट पर मौजूद रहकर पीएम मोदी का स्वागत किया था।
पिछले एक दशक में भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी काफी मजबूत हुई है। इस यात्रा में मुख्य रूप से रक्षा सहयोग एजेंडा पर चर्चा होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल अपनी प्रसिद्ध वायु रक्षा प्रणाली की तकनीक साझा करने का प्रस्ताव दे सकता है, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत किया जा सके।
रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग पहले से ही तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2026 तक द्विपक्षीय रक्षा व्यापार लगभग 8.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे France के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन सकता है। ड्रोन तकनीक, आधुनिक निगरानी प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा उपकरणों में इजरायल की विशेषज्ञता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यात्रा के दौरान साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और एआई आधारित तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। Knesset में पीएम मोदी का संबोधन भी प्रस्तावित है, जिससे वे वहां भाषण देने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे।
आर्थिक मोर्चे पर 2025 में हुए निवेश समझौते के बाद अब मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। यरुशलम में एक संयुक्त इनोवेशन कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है, जिसका उद्देश्य इजरायल की हाई-टेक क्षमता और भारत की बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन क्षमता को जोड़ना है।
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