अयोध्या: गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी दिवस पर सिख समाज ने दिया शांति व भाईचारे का संदेश
अयोध्या, अचल वार्ता। रामनगरी अयोध्या के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु नानक गोविंद धाम, नजरबाग में आज बंदी छोड़ दिवस एवं गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी दिवस के पावन अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित वार्षिक महान गुरमत समागम में देशभर से आई संगत ने श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ भाग लिया।कार्यक्रम में नानकसर सिंघड़ा करनाल से पधारे संत बाबा अमरजीत सिंह भोला ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सिख धर्म सदा से शांति, सेवा और भाईचारे का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, “हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं, समाज में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।” संगत को गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से गुरु चरणों से जोड़ा गया और गुरु नानक देव जी के उपदेशों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
गुरुद्वारा नजरबाग के जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह ने बताया कि बंदी छोड़ दिवस दीपावली के दिन सिखों के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी द्वारा ग्वालियर किले से 52 राजाओं को रिहा कर अमृतसर लाने की स्मृति में मनाया जाता है। उसी दिन अमृतसर नगरी दीपों से रोशन हुई थी।कार्यक्रम के अंत में संगत ने श्रद्धा और उत्साह के साथ लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
सेवादार नवनीत सिंह ने जानकारी दी कि नजरबाग स्थित यह गुरुद्वारा सिख इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है, जहां गुरु नानक देव जी और गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पड़े थे।
कार्यक्रम में पहुंचे बाबा करमजीत सिंह (करनाल) ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को स्मरण करते हुए उनके दिखाए मार्ग — मानवता, सेवा, समानता और एकता को समाज में फैलाना है।श्रद्धालुओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश जन-जन तक पहुंचाएंगे।
इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे:
भाई इंदरजीत सिंह (अमृतसर), भाई संतवीर सिंह, गुरप्रीत सिंह (गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ), परमजीत सिंह (नौतनवा), और आदित्य को लोग।
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