अयोध्या: अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी में काव्य, ग़ज़ल और होली गीतों की गूंज

अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी सिद्धेश्वर शिव मंदिर वजीरगंज में संपन्न, कवि-शायरों ने ग़ज़ल, गीत और होली रचनाओं से सजाई साहित्यिक संध्या।

Mar 1, 2026 - 20:23
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अयोध्या: अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी में काव्य, ग़ज़ल और होली गीतों की गूंज

वजीरगंज, अयोध्या, अचल वार्ता। सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी वजीरगंज रेलवे क्रॉसिंग स्थित सिद्धेश्वर शिव मंदिर में साहित्यिक उल्लास और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ संपन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्रह्मदेव मधुकर ने की, जबकि संचालन रामानन्द सागर द्वारा किया गया।

वाणी वंदना से हुआ शुभारंभ....

कार्यक्रम का शुभारंभ सुधांशु मोहन द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ—

“मेरी विनती तू कर स्वीकार मां, तू वीणा की कर झंकार…”

जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।

ग़ज़ल, गीत और दोहों से सजी साहित्यिक संध्या

वरिष्ठ कवि राजीव पांडे नादान गोंडवी ने ग़ज़ल सुनाई

“सांस लेना हराम है प्यारे, दिल अभी तक गुलाम है प्यारे…”

जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

संतोष अकेला ने प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया

“मेरे प्यारे राज दुलारे, एक दिन तो चमकेंगे सितारे…”

इसके बाद रविंद्र कबीर ने भावपूर्ण ग़ज़ल, और उदयभान मिश्रा ने जीवन दर्शन से जुड़े दोहे सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।

होली गीतों ने बांधा समां

सुधांशु मोहन दुबे ने दोहों के साथ होली गीत प्रस्तुत किया—

“मोबाइल के शौक का ऐसा चढ़ा बुखार, संबंधों का हो गया पूरा बंटाधार।”

वाहिद अली वाहिद के होली गीत—

“ननदी खेलै भौजाई संग हो रंग…”

ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

प्रेम, दर्शन और व्यंग्य की त्रिवेणी

अजय मौर्या अलबेला, राम दुलारे बौद्ध, चंद्रगत भारती एवं अजय श्रीवास्तव अज्जू ने प्रेम, दर्शन और सामाजिक यथार्थ से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

संचालक रामानन्द सागर ने अपने व्यंग्यात्मक गीत—

“एक निवाला ही नहीं पूरा पतीला खा गई…”

से श्रोताओं को हंसी और सोच दोनों का अवसर दिया।

अध्यक्षीय उद्बोधन

सभा अध्यक्ष ब्रह्मदेव मधुकर ने ब्रजभाषा में छंद सुनाते हुए कार्यक्रम को ऊँचाई दी—

“गावन मा तन पावन मा फिरै धूरि भरे संवरे गोरिया…”

अन्य रचनाकारों की सहभागिता

गोष्ठी में रामायण देव वर्मा, शिव प्रसाद गुप्त एवं शिवम सहित अन्य रचनाकारों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम का समापन साहित्यिक सौहार्द और रचनात्मक ऊर्जा के साथ हुआ।

- ब्यूरो रिपोर्ट 

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