अयोध्या: डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने की महंत कमल नयन दास से भेंट
- जब प्रधानमंत्री राम मंदिर में करेंगे ध्वजारोहण, तब 150 करोड़ सनातनी घर-घर फहराएँ धर्मध्वजा: डॉ आचार्य राजनंद शास्त्री
अयोध्या, अचल वार्ता। रामनगरी अयोध्या में रविवार को धर्म और राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत एक ऐतिहासिक भेंट हुई। प्रसिद्ध धर्माचार्य डॉ. आचार्य राजनंद शास्त्री ने आज मणिरामदास छावनी पहुँचकर वहाँ के पीठाधीश्वर महंत नृत्य गोपाल दास महाराज के कृपापात्र शिष्य महंत कमल नयन दास महाराज से सौजन्य भेंट की।
इस दौरान दोनों संतों के बीच राम मंदिर आंदोलन, सनातन संस्कृति की रक्षा, और धर्मध्वजा अभियान पर गहन चर्चा हुई।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि आने वाली 25 नवंबर का दिन सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए अभूतपूर्व और ऐतिहासिक होगा। इस दिन जब देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में ध्वजारोहण करेंगे, तब पूरे देश और विश्व में फैले 150 करोड़ सनातनी अपने-अपने घरों, संस्थानों, आश्रमों और मंदिरों पर धर्मध्वजा फहराएँ — यही सच्चा योगदान और भावनात्मक एकता का प्रतीक होगा।
उन्होंने कहा राम मंदिर केवल अयोध्या की नहीं, बल्कि हर रामभक्त की आत्मा से जुड़ा है। इस अवसर पर घर-घर धर्मध्वजा फहराना हमारी संस्कृति, परंपरा और सनातन गौरव का उत्सव होगा। हर हिंदू को इस महापर्व में अपनी सहभागिता दर्ज करनी चाहिए।”
भेंट के दौरान डॉ. शास्त्री ने यह भी बताया कि वे शीघ्र ही चित्रकूट धाम पहुँचेंगे, जहाँ वे कामतानाथ कामतगिरी पर्वत की परिक्रमा करेंगे और वहाँ आयोजित भारत मिलाप महोत्सव में महंत कमल नयन दास महाराज के साथ ससम्मान सम्मिलित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह भारत मिलाप महोत्सव “एकता और भाईचारे” का अनुपम संदेश देता है, और जब भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का मिलन होता है, तो वह क्षण केवल एक कथा नहीं बल्कि “राष्ट्र के एकात्म स्वरूप” का प्रतीक बन जाता है।
महंत कमल नयन दास महाराज ने डॉ. शास्त्री के इस संकल्प का स्वागत करते हुए कहा कि धर्मध्वजा अभियान को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया जाएगा।
उन्होंने कहा राम मंदिर निर्माण के इस स्वर्णिम काल में यदि हर घर पर धर्मध्वजा फहराई जाएगी तो यह न केवल श्रद्धा का प्रतीक होगा बल्कि यह भारत की आत्मा का जागरण होगा।”
अंत में दोनों संतों ने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की कि देश में धर्म, एकता, और सद्भावना बनी रहे तथा भारत विश्वगुरु के रूप में पुनः स्थापित हो।
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