अयोध्या : आयुर्वेद दिवस पर वन महोत्सव का भव्य आयोजन, औषधीय पौधों के महत्व पर दिया गया जोर

Sep 23, 2025 - 15:13
Oct 26, 2025 - 01:36
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अयोध्या : आयुर्वेद दिवस पर वन महोत्सव का भव्य आयोजन, औषधीय पौधों के महत्व पर दिया गया जोर
अयोध्या : आयुर्वेद दिवस पर वन महोत्सव का भव्य आयोजन, औषधीय पौधों के महत्व पर दिया गया जोर
अयोध्या : आयुर्वेद दिवस पर वन महोत्सव का भव्य आयोजन, औषधीय पौधों के महत्व पर दिया गया जोर

अचल वार्ता,अयोध्या।भारतीय परंपरा और जीवनशैली को संवारने वाले आयुर्वेद के महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस वर्ष से 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार इस विशेष अवसर पर अयोध्या में जिला क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह तथा वन विभाग के आरएफओ अरुण कुमार मौर्य ने चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

23 सितंबर का महत्व

कार्यक्रम में वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि भारत सरकार ने 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस घोषित किया है। यह तिथि क्षमता और सामर्थ्य का प्रतीक मानी जाती है। पूर्व में आयुर्वेद दिवस को अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता था, लेकिन अब यह तिथि स्थायी रूप से निर्धारित की गई है। इससे आयुर्वेद को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और मजबूती मिलेगी।

आयुर्वेद और वन विभाग का संयुक्त प्रयास

इस आयोजन की विशेषता रही कि इसे वन महोत्सव का रूप दिया गया। औषधीय पौधों के महत्व और उनके जीवन में उपयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि आयुर्वेद का आधार ही प्राकृतिक संसाधनों पर टिका हुआ है। वन विभाग की ओर से आमजन को पौधों का वितरण किया गया और चिकित्सकों ने उनके औषधीय गुणों की जानकारी दी।

वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आयुर्वेद दिवस को पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर बड़े पैमाने पर मनाया जाए। इसी क्रम में विभिन्न औषधीय पौधों जैसे नीम, अशोक, बेलपत्र, आँवला, तुलसी और गिलोय का वितरण और रोपण किया गया।

योग और आयुर्वेद : विश्व पटल पर भारत की पहचान

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार योग दिवस ने विश्व स्तर पर भारत को गौरव दिलाया है, उसी तरह आयुर्वेद दिवस भी वैश्विक स्वास्थ्य जगत में भारत की पहचान को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जिसमें खानपान, दिनचर्या और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर दिया गया है।

चिकित्सकों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर बड़ी संख्या में चिकित्सकों और अधिकारियों की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से 

डॉ. राहुल कुमार सिंह, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ. अशफाक अहमद, डॉ. धर्मेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. रोमी गुप्ता, डॉ. मोहानी, डॉ. कविता, डॉ. अमृता, डॉ. गिरजेश्वर उपाध्याय और डॉ. मिथलेश कुमार वर्मा सहित अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सक शामिल रहे।

कार्यक्रम का संदेश

आयुर्वेद दिवस पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि “स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र प्रकृति और आयुर्वेद में छिपा हुआ है। यदि हम पौधों और प्राकृतिक औषधियों का संरक्षण करेंगे तो भविष्य की पीढ़ियों को एक स्वस्थ समाज मिलेगा।”

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