अम्बेडकरनगर : “माँ के नाम पेड़ " मगर यहाँ तो पौधे माँ के पास ही चले गए
अचल वार्ता,अंबेडकर नगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान ने 9 जुलाई को 37 करोड़ पौधे लगाकर विश्व कीर्तिमान बना दिया। सरकार ने इसे “पर्यावरण का महाकुंभ” कहा और जिले अंबेडकरनगर ने भी पूरे जोश से 36 लाख पौधे लगाने की रिपोर्ट ठोंक दी। लेकिन जनाब, जमीनी सच्चाई तो ऐसी निकली कि “पौधे उगने से पहले ही मरने लगे, और जिन्दगी से पहले ही स्वर्गवासी हो गए।”
मामला ग्राम पंचायत खानपुर हुसैनाबाद का है।
यहां सचिवालय के सभागार में “विशेष अतिथि” बनाकर रखे गए पौधे बिना पानी, बिना मिट्टी और बिना परवाह के ऐसे सूखे कि टाइल्स की चमक ही उनसे ज्यादा ताज़ा लग रही है।
प्रधान जी बोले:
“हमें तो शुरुआत से ही सूखे पौधे मिले थे, हमने पूरी कोशिश की थी।” यानि, जो पौधे पहले से ही “स्वर्गीय” अवस्था में थे, उन्हें ज़मीन में भेजकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वन अधिकारी स्नेह कुमार बोले:
“भाईसाहब! पौधशालाओं से सूखे पौधे कभी नहीं दिए जाते।” यानी पौधे सूखे नहीं भेजे गए, रास्ते में ही “शहीद” हो गए।
गांव वाले बोले:
“जब भी पौधे मांगने जाते हैं, तो खाली हाथ लौटना पड़ता है। सचिवालय में पड़े पौधे सूखकर वहीं दम तोड़ देते हैं।” लगता है पौधरोपण अभियान यहाँ “फूलदान अभियान” में बदल गया।
एपीओ मनरेगा मनोज चतुर्वेदी बोले:
“यह प्रधान की घोर लापरवाही है, कार्रवाई होगी।” अब लापरवाही पे पौधे सूखें या पौधे पे लापरवाही सूख जाए, पर कार्रवाई का पौधा जरूर पनपेगा। ग्राम पंचायत अधिकारी सुजीत मौर्य का फोन बंद मिला। शायद वो भी पौधों की तरह “नेटवर्क से बाहर” चले गए हैं।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी का दवा
सरकार कह रही है – “हरियाली छाएगी”, गांव कह रहा है – “टाइल्स पर ही पौधे सुखाएंगे।” और जनता सोच रही है – “अगर ऐसे ही चलता रहा, तो ‘माँ के नाम पौधे’ की जगह अगली बार ‘माँ के नाम शोकसभा’ करनी पड़ेगी।”
योजना हरी-भरी थी, पर ज़मीन पर मुरझा गई।
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