अम्बेडकर नगर : मैं जिंदा हूँ... लेकिन सरकारी रिकॉर्ड ने मुझे मार डाला
- ज़िंदा होते हुए मृत घोषित बदामा देवी का दिलरूपी चीखता रोना
अंबेडकरनगर , अचल वार्ता। एक गरीब महिला को सरकारी कागजों में मौत का दर्जा दे दिया गया। पेंशन बंद, राशन बंद, संपत्ति का हक छिन गया जबकि बदामा देवी आज भी सांस ले रही हैं, बोल रही हैं और न्याय मांग रही हैं।
अकबरपुर ब्लॉक के ताराखुर्द गांव की निवासी बदामा देवी ने उपजिलाधिकारी के सामने खड़े होकर आंसू बहाते हुए कहा"हम हैं जिंदा!" पहली बार लालबिहारी स्टाइल में और दूसरी बार अकबरपुर तहसील में उनकी मौत दर्ज कर दी गई। परिवार रजिस्टर में नाम मृतक के रूप में अंकित हो गया।
बदामा देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस पर उपजिलाधिकारी के समक्ष हाजिर होकर अपनी जिंदगी वापस मांगी।पंचायत अधिकारी जयप्रकाश वर्मा ने तुरंत रिपोर्ट लगाई।
उपजिलाधिकारी ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा , 7 दिनों के अंदर बदामा देवी को जीवित दर्ज किया जाए और पूरे मामले की जांच हो।बिना जांच के एक ज़िंदा इंसान को दो बार मृत कैसे घोषित कर दिया गया? कौन जिम्मेदार है?
क्या ये महज लापरवाही है या कोई गहरा घोटाला?यह मामला केवल बदामा देवी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का है।ज़िंदा लोग कागजों में मर रहे हैं और सरकारी मशीनरी बेखबर है।
बदामा देवी की पुकार, मैं मरी नहीं हूँ... मुझे जिंदा होने का हक दो ! "जिंदा हूं मैं "
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