अम्बेडकरनगर: मकोईया में अमृत सरोवर या "भ्रष्टाचार सरोवर" ? तालाब बना तबेला, नोटों की बही खाता
अमृत सरोवर मिशन, वो केंद्र सरकार की चमचमाती योजना, जिसका मकसद था हर जिले में 75 तालाबों को "मानसरोवर" बनाना, जल संरक्षण करना और भूजल को बढ़ाना। लेकिन अम्बेडकर नगर के बसखारी विकासखंड की ग्राम पंचायत मकोईया में ये "अमृत" कुछ ज्यादा ही "खट्टा" हो गया! यहाँ तालाब नहीं, भ्रष्टाचार का गड्ढा खोदा गया, और ग्रामीणों ने इसे मजाक में "मानसरोवर तबेला" का तमगा दे दिया। तो चलिए, इस कहानी को थोड़ा मसालेदार और मजेदार अंदाज में सुनाते हैं!
अमृत सरोवर: सपना था, तबेला बना!
केंद्र सरकार ने 2022 में आजादी के अमृत महोत्सव के जोश में मिशन अमृत सरोवर लॉन्च किया। उद्देश्य था ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण, तालाबों का कायाकल्प, और हर जिले में कम से कम 75 चमचमाते तालाब, जिनका क्षेत्रफल कम से कम 1 एकड़ हो। योजना को नरेगा और 15वें वित्त आयोग के फंड से पंख लगने थे। मकोईया में भी तालाब को पिकनिक स्पॉट और जल संरक्षण का मॉडल बनाने का सपना दिखाया गया। लेकिन हाय रे हकीकत! यहाँ तो तालाब में पानी की जगह भ्रष्टाचार की बाढ़ आ गई!
कागजों में "मानसरोवर", जमीनी हकीकत "तबेला"
मीडिया की पड़ताल ने मकोईया तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर हुए खेल को उजागर किया। सुनिए जरा, मास्टर रोल में क्या-क्या कमाल हुआ:2022-23 में: 6 लाख रुपये निकाले गए, कागजों पर तालाब को "स्वर्ग का सरोवर" बना दिया।
2024-25 में: 3 लाख रुपये और हजम! मास्टर रोल में 24,648 से लेकर 28,440 रुपये तक के भुगतान दिखाए गए। लेकिन मौके पर? न तटबंध, न इंटरलॉकिंग, न पेड़-पौधे, और न ही पानी! बस तालाब में उगे घास फूस।
ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा, "हमारे यहाँ अमृत सरोवर नहीं, भ्रष्टाचार सरोवर बना है! सरपंच और सचिव ने मिलकर तालाब को नोटों की नाली बना डाला।" एक चाचा ने तो हँसते हुए कहा, "भाई, यहाँ घोड़ा नहीं, भ्रष्टाचार का गधा दौड़ रहा है!"
मीडिया की खोज: कागजों में सब हिट, हकीकत में फ्लॉप!जब मीडिया ने तालाब का जायजा लिया, तो सच्चाई ने होश उड़ा दिए। लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन तालाब की हालत वैसी ही, जैसे किसी ने कहा हो, "बस, कागजों में तालाब बना दो, जमीन पर तो भैंसें चर लेंगी!" न सौंदर्यीकरण हुआ, न जल संरक्षण का कोई काम। ग्रामीणों ने गुस्से में कहा, "अमृत सरोवर में अमृत नहीं, सरपंच की तिजोरी में नोटों की गठरी भरी गई!"
ग्रामीणों की पुकार: "जांच करो, भ्रष्टाचार भगाओ!"गाँव वाले अब आगबबूला हैं। उनकी मांग है कि इस "भ्रष्टाचार सरोवर" की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषियों को सजा मिले, और तालाब का असली जीर्णोद्धार हो। एक बुजुर्ग ने चुटकी लेते हुए कहा, "अगर ऐसे ही चला, तो ये तालाब विष सरोवर बन जाएगा, और हमारी अगली पीढ़ी सिर्फ कीचड़ में गोते लगाएगी!"
सवाल ये है: अमृत बहेगा या भ्रष्टाचार की नाली?मकोईया का ये तालाब अब जिला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। क्या अमृत सरोवर का सपना सच होगा, या ये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर "मानसरोवर तबेला" ही रहेगा? ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। तो, क्या होगा—अमृत की धारा या भ्रष्टाचार की बाढ़? जवाब का इंतजार है, और हम भी कहते हैं, "जांच करो, सच सामने लाओ, और तालाब में अमृत भर दो!"
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