अयोध्या:कंचन भवन में देव उठनी एकादशी का भव्य उत्सव: भगवान श्रीहरि योगनिद्रा से जागे, गूंजा ‘हरि जागे, जग जागे’ का जयघोष
अयोध्या, अचल वार्ता। पावन नगरी अयोध्या में शनिवार को देव उठनी एकादशी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कंचन भवन मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजन हुआ।
भगवान श्रीहरि विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा से जागने के उपलक्ष्य में भक्तों ने उत्सव मनाया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, भजन-कीर्तन और आरती से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
महंत विजय दास बोले “आज भगवान जागे हैं, धर्म से जुड़ना ही सच्चा जागरण है”कंचन भवन के पीठाधीश्वर महंत विजय दास महाराज ने इस अवसर पर कहा कि देव उठनी एकादशी का दिन हर भक्त के जीवन में अध्यात्मिक चेतना जगाने वाला होता है।
उन्होंने कहा “भगवान चार महीने की योगनिद्रा में थे, आज वे जागे हैं। यह केवल देव जागरण नहीं, बल्कि हमारे भीतर के धर्म और कर्तव्यबोध को जगाने का दिन है। हर व्यक्ति को अपने धर्म, परंपरा और समाज के प्रति जागरूक रहना चाहिए। कथा, सत्संग और परिक्रमा के माध्यम से ही जीवन का सच्चा उद्देश्य प्राप्त होता है।
महंत विजय दास ने आगे कहा कि अयोध्या की भूमि स्वयं धर्म, भक्ति और सेवा की आधारशिला है। यहाँ हर पर्व समाज को जोड़ने का माध्यम बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धर्म और संस्कार की परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।पूरे परिसर में हुआ हरि जागरण, तुलसी विवाह और भजन-कीर्तनकंचन भवन के प्रांगण में तड़के से ही पूजा-अर्चना आरंभ हुई। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण जी की विशेष आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात तुलसी विवाह, हरि जागरण, कथा-भागवत और भजन संध्या का आयोजन हुआ।भक्तों ने दीप जलाकर भगवान के चरणों में प्रणाम किया और “जय श्रीराम”, “हरि जागे जग जागे” के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
आयोजन में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़सु बह से ही भक्तों की कतारें मंदिर की गलियों तक फैली थीं। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। कई भक्तों ने संकल्प किया कि वे आने वाले समय में कथा-सत्संग में नियमित रूप से भाग लेंगे।आयोजन की जिम्मेदारी संभाली रवि प्रताप राय नेभव्य कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था कंचन भवन आश्रम के व्यवस्थापक रवि प्रताप राय के कुशल नेतृत्व में की गई। उन्होंने बताया कि देव उठनी एकादशी का यह पर्व हर वर्ष परंपरागत रूप से मनाया जाता है। इस बार भी मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था, और पूरे आयोजन में भक्ति और अनुशासन की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
उन्होंने कह “महंत विजय दास जी के मार्गदर्शन में यह आयोजन भक्तों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।”धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वदेव उठनी एकादशी को प्रभु जागरण पर्व के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस दिन से मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञ, दान आदि पुनः आरंभ किए जाते हैं।अयोध्या में इस पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि यहां श्रीराम जन्मभूमि से लेकर सरयू घाट तक भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
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