अम्बेडकर नगर: सरकारी स्कूल में दिनदहाड़े 3 हरे पेड़ों की हत्या, सबूत मिटाने की साजिश का आरोप

Dec 17, 2025 - 09:18
Jan 18, 2026 - 10:50
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अम्बेडकर नगर: सरकारी स्कूल में दिनदहाड़े 3 हरे पेड़ों की हत्या, सबूत मिटाने की साजिश का आरोप

अंबेडकर नगर, अचल वार्ता। पहितीपुर राजकीय हाई स्कूल, पहितीपर के प्रांगण में बुधवार को खुलेआम तीन हरे-भरे पेड़ों की कटान कर दी गई। आरोप है कि पेड़ों को काटकर लकड़ी ट्रॉली पर लादकर बेच दिया गया, जबकि मौके पर केवल ठूंठ और जड़ें ही छोड़ी गईं। घटना ने न सिर्फ वन कानूनों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रधानाचार्य का दोहरा बयान, फिर धमकी भरा जवाब

घटना के संबंध में जब विद्यालय के प्रधानाचार्य से सवाल किया गया तो पहले उन्होंने पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। लेकिन जब रिपोर्टर ने कानून और अनुमति से जुड़े प्रश्न पूछे तो कथित तौर पर जवाब मिला—

जहां शिकायत करनी है कर दीजिए, कुछ नहीं होगा।

इस बयान ने मामले को और संदिग्ध बना दिया।

अधिकारी से बातचीत में ‘सबूत मिटाने’ की चर्चा!

मामले में प्रधानाचार्य ने रिपोर्टर की बातचीत एक अन्य अधिकारी श्री जितेंद्र पांडे से कराई। आरोप है कि बातचीत के दौरान अधिकारी द्वारा प्रधानाचार्य से यह कहते सुना गया कि सबूत मिटा दो।

इसके बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि जेसीबी मशीन से पेड़ों की जड़ें उखाड़कर साक्ष्य नष्ट करने की तैयारी की जा रही है।

सरकारी भूमि, फिर भी वन माफियाओं का खेल?

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय परिसर पूरी तरह सरकारी भूमि है और हरे पेड़ों की कटान बिना वन विभाग की अनुमति सीधे-सीधे वन अधिनियम का अपराध है। वर्तमान में मौके पर मौजूद पेड़ों की जड़ें ही इस अवैध कटान का आखिरी सबूत हैं।

प्रशासन मौन, सवाल गंभीर

घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद न वन विभाग मौके पर पहुंचा और न ही शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई की। प्रशासन की यह चुप्पी अब संदेह को और गहरा कर रही है।

स्थानीय लोगों की चेतावनी

ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए दोषियों पर वन अधिनियम व सरकारी संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हो

सबूत नष्ट होने से पहले प्रशासन मौके पर पहुंचे

लोगों का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में ही इस तरह खुलेआम पेड़ों की कटान और सबूतों से छेड़छाड़ होगी, तो पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा केवल कागज़ों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

सवाल यह है—

क्या सरकारी स्कूल अब लकड़ी माफियाओं की सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं?

क्या जिम्मेदार अधिकारी सबूत मिटाकर पूरे मामले को रफा-दफा कर देंगे?

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