अंबेडकर नगर : प्रशासनिक फेलियर ! एक हजार जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र तहसील में लंबित, जनता परेशान
अंबेडकरनगर, अचल वार्ता। जनगणना खत्म हो चुकी, लेकिन आम जनता अब भी भारी मुसीबत में फँसी हुई है। अंबेडकर नगर जिले में एक हजार से अधिक जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदन तहसील स्तर पर महीनों से लंबित पड़े हैं। नगर पालिका स्तर पर सत्यापन के बाद भी तहसील से प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की जिंदगी प्रभावित हो गई है।जनगणना ड्यूटी में व्यस्त कर्मचारियों के कारण प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया ठप पड़ गई है।
आवेदक नगर पालिका, तहसील और सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी ज्यादातर आवेदनों का कोई हल नहीं निकला है। नवजात बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा, स्कूल में प्रवेश मुश्किल।मृत्यु प्रमाणपत्र न बनने से सरकारी योजनाओं का लाभ रुक गया।राशन कार्ड में नाम नहीं जुड़ पा रहा।कई बच्चों का स्कूल एडमिशन अटका हुआ है।
अकबरपुर नगर पालिका में जनवरी से अप्रैल तक एक हजार आवेदन आए, जो अभी भी तहसील कार्यालय में धूल फाँक रहे हैं। विजयगढ़ के एक परिवार ने दादी की मृत्यु का प्रमाणपत्र बनाने के लिए चार महीने पहले ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन तहसील पहुँचते ही रिपोर्ट गुम हो गई।मीरानपुर के संजय विश्वकर्मा दो महीने से बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के चक्कर काट रहे हैं।गांधीनगर के पंकज और मिर्जापुर के आशीष भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
नगर पालिका के नियमों के अनुसार 21 दिनों के अंदर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हो जाना चाहिए। इसके बाद एसडीएम के समक्ष अपील की जा सकती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से पूरी प्रक्रिया ठप है। अधिशासी अधिकारी विशाल सारस्वत ने भी स्वीकार किया कि जनगणना ड्यूटी मुख्य कारण है। क्या जनगणना सिर्फ आंकड़े जुटाने के लिए थी, या जनता की सुविधा के लिए भी? जब तक तहसील स्तर पर सत्यापन नहीं होगा, प्रमाणपत्र कैसे बनेंगे ?
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