अम्बेडकर नगर: LPG सिलेंडरों की असुरक्षित डिलीवरी: मोटरसाइकिल पर 5-6 सिलेंडर लादकर जोखिम में डाल रहे जानें, प्रशासन चुप्पी साधे?
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जिले के बसखारी क्षेत्र में इंडियन ऑयल और भारत गैस की एजेंसियां घर-घर LPG सिलेंडर डिलीवरी का दावा तो कर रही हैं, लेकिन यह सेवा जानलेवा साबित हो रही है। डिलीवरी कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपाय के मोटरसाइकिल या ठेलिया पर 3-4-5 भारी सिलेंडर लादकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे न केवल डिलीवरी बॉय की जान को खतरा है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों की सुरक्षा भी दांव पर लटक रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या गैस कंपनियां और स्थानीय प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अनियमितता रोजमर्रा की हो चुकी है। बसखारी के ग्रामीणों ने नाम न छापने के शर्त बताया, "हमारे गांव में गैस एजेंसी के डिलीवरी बॉय सिलेंडरों को मोटरसाइकिल के पिछले हिस्से लटकाएं रहते रस्सी से भी नहीं बांधकर ले जाते हैं। एक झटका लगे तो सिलेंडर गिरकर फट सकते हैं। लेकिन एजेंसी वाले कहते हैं कि वाहन नहीं हैं, तो क्या करें?"
एक राहगीर नाम न छापने शर्त पर बताया एक डिलीवरी बॉय के सिलेंडर लदे बाइक सड़क पर लुढ़क गई। गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह रोज का रिस्क है।" यह मुद्दा केवल सुविधा की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। गैस सिलेंडर रूल्स, 2016 (भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन - PESO द्वारा लागू) के अनुसार, LPG सिलेंडरों का परिवहन केवल अधिकृत वाहनों से किया जाना चाहिए। इन वाहनों में सिलेंडरों को विशेष धातु के क्रैडल या कैबिनेट में सुरक्षित रूप से बांधना अनिवार्य है, ताकि दुर्घटना के दौरान वे न गिरें या नुकसान न पहुंचाएं।
मोटरसाइकिल या ठेलिया पर अधिकतम 1-2 सिलेंडर ही ले जाना शर्त है, और वह भी हेलमेट, दस्ताने व अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ। लेकिन यहां 5-6 सिलेंडर लादकर बिना हेलमेट के दौड़ना आम बात हो गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह उल्लंघन गंभीर है। LPG सिलेंडर ज्वलनशील होते हैं। एक छोटी चिंगारी से विस्फोट हो सकता है। गैस सिलेंडर रूल्स की धारा 19 के तहत परिवहन के दौरान सिलेंडरों को सीधा रखना, लीकेज चेक करना और अधिकृत वाहन का उपयोग अनिवार्य है। उल्लंघन पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द हो सकता है।" इसी तरह, मार्केटिंग डिसिप्लिनरी गाइडलाइंस 2022 में भी डिलीवरी के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी बताया गया है।
फिर सवाल यह कि गैस कंपनियां इसकी अनदेखी क्यों कर रही हैं? इंडियन ऑयल और भारत गैस की स्थानीय एजेंसियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया । आखिर क्या गैस एजेंसियों की मिलीभगत से "डिलीवरी बॉय लोकल हैं, वे जो तरीका अपनाते हैं, वैसा ही चल रहा है। वाहन की कमी है।" लेकिन ग्राहक शिकायतों का ढेर लग रहा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न के बराबर है।प्रशासन की चुप्पी और भी हैरान करने वाली है। अम्बेडकरनगर जिला प्रशासन और पुलिस कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। जानकारी के लिए सीयूजी नंबर पर एसडीएम कार्यालय से जब संपर्क किया गया तो संपर्क नहीं हो पाया
ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल डिलीवरी वाहनों की व्यवस्था हो, सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए और उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाए। गैस कंपनियों को निर्देश दिए जाएं कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। अन्यथा, यह सेवा 'घर-घर डिलीवरी' के बजाय ''राहों में ही कभी बड़े हादसे हो सकते हैं।
- ब्यूरो रिपोर्ट
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