पीलीभीत में बढ़ा सारसों का कुनबा, शीतकालीन गणना में मिले 98 सारस
बीसलपुर रेंज रही अव्वल, संरक्षण प्रयासों के दिखे सुखद परिणाम
पीलीभीत, अचल वार्ता। उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों के सुखद परिणाम जनपद पीलीभीत में सामने आए हैं। पीलीभीत वन एवं वन्यजीव प्रभाग द्वारा हाल ही में संपन्न शीतकालीन सारस गणना– 2025 के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं।
गणना के अनुसार जिले में कुल 98 सारस पाए गए हैं, जो ग्रीष्मकालीन गणना में दर्ज 95 सारसों की तुलना में वृद्धि को दर्शाता है। यह बढ़ोतरी जिले के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र और आर्द्रभूमि के स्वस्थ होने का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 15 और 16 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय सारस गणना अभियान चलाया गया। यह अभियान पीलीभीत, बीसलपुर और पूरनपुर की तीनों रेंजों में संचालित हुआ।
प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डी.के. के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग की टीमों ने जलाशयों, तालाबों, कृषि क्षेत्रों, दलदली इलाकों और अन्य संभावित स्थलों पर गहन सर्वेक्षण कर सारसों की गणना की।विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बीसलपुर रेंज सारस संरक्षण में सबसे आगे रही, जहां सर्वाधिक 52 सारस पाए गए।
इस रेंज के ग्राम चौसर हरदो पट्टी में 10, एक अन्य ग्राम में 9, करेली व बमरौली में 8-8, बरखेड़ा में 5, सुहास में 4, लमुआ व बहादुरपुर में 3-3 तथा अर्जुनपुर में 2 सारस दर्ज किए गए।पीलीभीत रेंज में कुल 22 सारस मिले। यहां ग्राम बरातबोझ में 4, सड़िया मुस्तकिल में 3 तथा महुआ, चठिया, न्यूरिया हुसैनपुर, घेरा रिछौला, बगब, सियावाड़ी पट्टी, गिधौर, सूरजपुर और टांडा बिजैसी में 2-2 सारस पाए गए।
वहीं पूरनपुर रेंज में कुल 21 सारस दर्ज किए गए, जिनमें ग्राम घुंघचिहाई में सर्वाधिक 10, नाधौटांडा में 6, कलीनगर में 3 और सकरिया में 2 सारस शामिल हैं।प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डी.के. ने बताया कि शीतकालीन गणना में कुल 89 वयस्क सारस और 9 बच्चे पाए गए हैं। जून 2025 में हुई ग्रीष्मकालीन गणना में भी 9 बच्चे दर्ज किए गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रजनन की स्थिति स्थिर और सकारात्मक है।
वन विभाग ने इस सफलता का श्रेय पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता, ग्रामीणों के सहयोग और सारसों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को दिया है।वन विभाग ने भविष्य में भी जलस्रोतों के संरक्षण, अवैध शिकार पर सख्ती और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियानों को और तेज करने की बात कही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में पीलीभीत सारस संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
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