यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, राजनीति गरम; बीजेपी-विपक्ष आमने-सामने

UGC Promotion of Equity Regulations 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक। कोर्ट ने नियमों को अस्पष्ट बताया। फैसले पर BJP और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं।

Jan 30, 2026 - 19:49
Feb 12, 2026 - 17:10
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यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, राजनीति गरम; बीजेपी-विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली, अचल वार्ता।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेग्युलेशंस 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि इन नियमों के प्रावधान प्रथम दृष्टया अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ओर से बयान सामने आए हैं।

बीजेपी ने फैसले का किया स्वागत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों की रक्षा से जुड़ा कदम बताया है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया और ईडब्ल्यूएस आरक्षण इसका प्रमाण है।

वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई और सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो संविधान के अनुरूप है।

सरकार कोर्ट के आदेश का करेगी पालन

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करेगी।

बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्र और नेता बृजभूषण शरण सिंह ने भी फैसले को न्यायसंगत बताते हुए कहा कि नए नियमों से सामाजिक टकराव की आशंका थी, जिसे अदालत ने समय रहते रोक दिया।

विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई नजर आई।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

अखिलेश यादव ने कहा, “सच्चा न्याय वही है जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो और कानून की भाषा व नीयत दोनों स्पष्ट हों।”

मायावती ने कहा कि नए नियमों से सामाजिक तनाव बढ़ रहा था, इसलिए कोर्ट का फैसला सही है।

कांग्रेस और आरजेडी ने उठाए सवाल

दूसरी ओर कांग्रेस और आरजेडी ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जाति और धर्म के नाम पर विवाद खड़ा कर रही है।

आरजेडी सांसद मनोज झा ने इसे यथास्थिति बनाए रखने की कोशिश करार दिया।

इस बीच कवि और विचारक कुमार विश्वास ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश इस समय किसी भी तरह के बंटवारे को सहन नहीं कर सकता और सरकार को समाधान की दिशा में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

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