45 साल पुराने पारिवारिक पेंशन मामले में हाईकोर्ट सख्त, कानपुर नगर निगम को एक सप्ताह का समय
Allahabad High Court ने 45 साल पुराने पारिवारिक पेंशन मामले में Kanpur Nagar Nigam को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में समाधान करने का आदेश दिया है। नाम की स्पेलिंग त्रुटि के कारण पेंशन रोकी गई थी।
प्रयागराज,अचल वार्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े 45 साल पुराने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कानपुर नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने मामले का समाधान एक सप्ताह के अंदर करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम दी चौहान की सिंगल बेंच में हुई, जहां याचिकाकर्ता मंजू राय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की गई।
1975 से लटका था पारिवारिक पेंशन विवाद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता महिला के पिता नगर निगम में कर्मचारी थे। वे वर्ष 1975 में सेवानिवृत्त हुए और 1980 में उनका निधन हो गया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नियमित पेंशन मिलती रही, लेकिन मृत्यु के बाद परिवार ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया तो विभाग ने फाइल में त्रुटि का हवाला देकर मामला लटका दिया।
विवाद का मुख्य कारण नाम की स्पेलिंग में अंतर बताया गया। सर्विस रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता के पिता का नाम शिखर नाथ शुक्ल दर्ज था, जबकि आवेदन और कुछ दस्तावेजों में शेखर नाथ शुक्ल लिखा हुआ था। अंग्रेजी में लिखे नाम में ‘I’ और ‘E’ के अंतर को आधार बनाकर विभाग ने पारिवारिक पेंशन देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने दस्तावेजों को माना पर्याप्त
याचिकाकर्ता ने पहचान साबित करने के लिए शपथपत्र, सक्सेशन सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। कोर्ट ने माना कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं और केवल स्पेलिंग की त्रुटि के कारण पेंशन रोकी नहीं जा सकती।
एक सप्ताह में निस्तारण का आदेश
हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर 26 फरवरी को अगली सुनवाई में नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।
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