राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर बाबा मोहनदास की कुटी में उमड़ा आस्था और सेवा का सैलाब
अयोध्या के रुदौली क्षेत्र में बाबा मोहनदास की कुटी में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाई गई। कंबल वितरण, विशाल भंडारा और दीपोत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ा।
रुदौली/अयोध्या, अचल वार्ता। रुदौली विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित बाबा मोहनदास की कुटी (कसारी) में गुरुवार को प्रभु श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ ऐतिहासिक भव्यता और जनसेवा के अद्भुत संगम के साथ मनाई गई। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि मानवता की सेवा का एक स्वर्णिम अध्याय भी साबित हुआ।
कार्यक्रम के आयोजक एवं सूत्रधार श्रवण सिंह ने “नर सेवा ही नारायण सेवा” के संकल्प को साकार करते हुए आयोजन को विराट स्वरूप दिया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए उन्होंने 1100 जरूरतमंदों, बुजुर्गों एवं असहाय लोगों को उच्च गुणवत्ता के कंबल वितरित कराए। इसके साथ ही हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
विधायक रामचंद्र यादव का भव्य स्वागत
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे लोकप्रिय विधायक रामचंद्र यादव का आयोजक श्रवण सिंह एवं सहयोगियों द्वारा विशाल पुष्पहार पहनाकर और अंगवस्त्र भेंटकर भव्य स्वागत किया गया। विधायक श्री यादव ने अपने कर-कमलों से कंबल वितरित करते हुए आयोजक के सेवा भाव को नमन किया।
अपने संबोधन में विधायक रामचंद्र यादव ने कहा—
“राम काज केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसेवा ही सच्चा धर्म है।”
सेवा ही ईश्वर की सर्वोत्तम पूजा
विशिष्ट अतिथि सुमन पासवान ने कहा कि असहायों की सेवा ही ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ पूजा है और ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं।
दीपोत्सव में जगमगा उठा आश्रम परिसर
दिनभर चले भंडारे के बाद संध्या काल में आयोजित भव्य दीपोत्सव ने पूरे आश्रम परिसर को अलौकिक आभा से प्रकाशित कर दिया। दीपों की रोशनी में बाबा मोहनदास की कुटी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आई।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस पुनीत अवसर पर महंत सुग्रीव दास, दिनेश मिश्रा, माता बदल पांडेय, राजेश श्रीवास्तव, भुलई विश्वकर्मा, ठाकुर बख्श सिंह, विनोद सिंह, मोनू सिंह, प्रताप बहादुर सिंह, निसार मास्टर सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने आयोजक श्रवण सिंह के इस सेवाभावी, साहसिक और अनुकरणीय प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
- वीरेंद्र यादव
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