बगीचे में मिली लाश, आनन-फानन में अंतिम संस्कार .. अब उठे सवाल: क्या छुपाई जा रही है हत्या की असली कहानी ❓
लखीमपुर खीरी , अचल वार्ता। जिले के थाना शारदा नगर क्षेत्र के मौजा मकसोहा में 4 मार्च 2026 की शाम हुई एक संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम रामनगरी निवासी 35 वर्षीय सुत्तन पुत्र प्यारेलाल को शाम लगभग 6 बजे उसके सगे भतीजे मोनू पुत्र चन्दीका जबरन घर से बुलाकर ले गए। बताया जाता है कि पतरासी चौराहे से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित एक बगीचे में ले जाकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
काफी समय तक घर वापस न लौटने पर मृतक के भाई राजकुमार और उमाशंकर आपने भाई की तलाश में निकले, तभी उन्हें सूचना मिली कि पतरासी से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर बगीचे में एक शव पड़ा है। मौके पर पहुंचकर उन्होंने शव की पहचान अपने भाई सुत्तन के रूप में की और शव को घर ले आए। हैरानी की बात यह रही कि मृतक की ससुराल भी उसी गांव में होने के कारण सभी भाई और भतीजे तुरंत मौके पर पहुंच गए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या पोस्टमार्टम के आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया। उस समय सगे भाई होने के नाते किसी ने शक जाहिर नहीं किया, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद भाई और भतीजों की आपसी बातचीत से यह संकेत मिलने लगे कि सुत्तन की मौत के पीछे कोई बड़ी वजह छिपाई जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी जल्दी अंतिम संस्कार कराने की क्या मजबूरी थी और पोस्टमार्टम से क्यों बचा गया? परिवार में पत्नी बिटाना और तीन मासूम बच्चे—बड़ा पुत्र बबित (10 वर्ष), पुत्री ममता (7 वर्ष) और जूली (6 वर्ष) हैं, जिनके सिर से अचानक पिता का साया उठ गया।
ग्रामीणों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं और लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर मौत स्वाभाविक थी तो पोस्टमार्टम से परहेज क्यों किया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि सच्चाई को राख में दबाने की कोशिश की गई हो? अब यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि यह मौत थी या एक सुनियोजित साजिश जिसे जल्दबाजी में अंतिम संस्कार की आग में दफन कर दिया गया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0