अम्बेडकर नगर : अमृत सरोवर योजना में भ्रष्टाचार का खुलासा, मकोईया तालाब बना "भ्रष्टाचार की गठरी"

Sep 9, 2025 - 22:11
Oct 22, 2025 - 22:17
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अम्बेडकर नगर : अमृत सरोवर योजना में भ्रष्टाचार का खुलासा, मकोईया तालाब बना "भ्रष्टाचार की गठरी"

अचल वार्ता,अम्बेडकर नगर। विकास खण्ड बसख बसखारी ग्राम पंचायत के मकोईया में अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के नाम पर करीब तीन लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। मीडिया की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं, जहां कागजों पर तालाब को "मानसरोवर" बनाया गया, लेकिन हकीकत में यह "तबेले" में तब्दील हो गया। ग्रामीणों ने इस योजना को "भ्रष्टाचार सरोवर योजना" का नाम दे दिया और सरपंच व सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

कागजों में दौड़ा विकास का घोड़ा, जमीनी हकीकत उलट 

मीडिया जांच में सामने आया कि मकोईया तालाब के लिए मास्टर रोल में लगभग 3 लाख रुपये निकाले गए। मास्टर रोल नंबर 1040 पर 24,648 रुपये, 1025 पर 13,035 रुपये, 1026 पर 25,833 रुपये, 1027 पर 28,440 रुपये, 1028 पर 9,243 रुपये, 1998 पर 27,018 रुपये, 1999 पर 13,746 रुपये, 2000 पर 23,700 रुपये, 2001 पर 26,781 रुपये और 2002 पर 18,960 रुपये का भुगतान दर्शाया गया। लेकिन मौके पर तालाब की हालत बदहाल है। न तो सौंदर्यीकरण हुआ, न ही जल संरक्षण के लिए कोई ठोस काम। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच और सचिव ने मिलकर सरकारी धन का बंदरबांट किया और तालाब को "नोटों की नाली" बना दिया।

ग्रामीणों का गुस्सा: "अमृत नहीं, भ्रष्टाचार की गठरी भरी गई"

गांव वालों का आरोप है कि अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब को पिकनिक स्पॉट और जल संरक्षण का केंद्र बनाने का वादा किया गया था, लेकिन नतीजा शून्य रहा। एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा, "हमारे गांव में घोड़ा नहीं, भ्रष्टाचार का गधा दौड़ रहा है!" ग्रामीणों ने तालाब का नाम मजाक में "मानसरोवर तबेला" रख दिया, क्योंकि वहां न पानी है, न बेंच, न पेड़-पौधे—सिर्फ मवेशी बंधे नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच और सचिव ने योजना को "कमाऊ पूत" बना लिया, जिसमें भ्रष्टाचार के घोड़े दौड़ाए गए। 

 मीडिया पड़ताल: चौंकाने वाली सच्चाई

जब मीडिया ने तालाब की जमीनी हकीकत की पड़ताल की, तो पाया गया कि अमृत सरोवर के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन तालाब की स्थिति जस की तस है। न तो तटबंध बनाए गए, न ही इंटरलॉकिंग, वृक्षारोपण या अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी मास्टर रोल बनाकर सरकारी धन की लूट की गई। एक ग्रामीण ने कहा, "अमृत सरोवर में अमृत नहीं, सरपंच और सचिव की तिजोरी में भ्रष्टाचार की गठरी भरी गई।" 

ग्रामीणों की मांग: उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई

गांव वालों ने मांग की है कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो, ताकि अमृत सरोवर योजना के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आए। उनका कहना है कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो यह योजना ग्रामीणों के लिए "विष सरोवर" बनकर रह जाएगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से अपील की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और तालाब का सही मायने में जीर्णोद्धार हो। 

सवाल बरकरार: अमृत बहेगा या भ्रष्टाचार की नाली?

यह मामला अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है। क्या बसखारी के मकोईया तालाब में अमृत सरोवर का सपना साकार होगा, या यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर "मानसरोवर तबेला" ही बना रहेगा? ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

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