अयोध्या: जगतगुरु राघवाचार्य जी महाराज के दिव्य वचनों से गूंजा अयोध्या

Oct 27, 2025 - 16:42
Nov 11, 2025 - 21:55
 0  2
अयोध्या: जगतगुरु राघवाचार्य जी महाराज के दिव्य वचनों से गूंजा अयोध्या
अयोध्या: जगतगुरु राघवाचार्य जी महाराज के दिव्य वचनों से गूंजा अयोध्या
  • श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्तिमय हुआ साकेत धाम

अयोध्या, अचल वार्ता। श्रीराम नगरी अयोध्या के साकेत धाम में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का तीसरा दिवस आज अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।कथा का दिव्य वाचन परम पूज्य जगतगुरु राघवाचार्य जी महाराज के पावन मुखारविंद से हुआ।महाराज श्री के श्रीमुख से जब ध्रुव चरित्र का वर्णन आरंभ हुआ, तो समूचा पंडाल भक्ति और श्रद्धा के रस में डूब गया।जगतगुरु राघवाचार्य जी महाराज का दिव्य प्रवचनमहाराज श्री ने कहा —भक्ति में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, केवल विश्वास की गहराई मायने रखती है। पाँच वर्ष का बालक भी यदि भगवान से सच्चे मन से जुड़ जाए, तो सृष्टि को हिला सकता है।”महाराज श्री ने बालक ध्रुव की कठिन तपस्या का विस्तार से वर्णन किया —पहले महीने में कंद-मूल फल, दूसरे महीने में केवल जल, तीसरे महीने में वायु पर जीवित रहकर निरंतर जप,चौथे महीने में भोजन-जल का पूर्ण त्याग और पाँचवें महीने में खुले आकाश के नीचे एक पैर पर खड़े होकर अखंड समाधि।महाराज श्री ने कहा —त्रिवेदी व्यास जी लिखते हैं — ‘पंचमी अनूप प्रति देता श्वास’, अर्थात ध्रुव जी की तपस्या ऐसी थी कि सांस भी भगवान के नाम में विलीन हो गई।”उन्होंने आगे कहा —ध्रुव की भक्ति से देवता भयभीत हो गए। इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु सभी भगवान विष्णु के पास जाकर बोले — ‘प्रभो! यह बालक अपनी तपस्या से हमें भी विचलित कर रहा है।’ तब भगवान बोले — ‘चिंता मत करो, मैं स्वयं अपने भक्त को दर्शन दूँगा।’”महाराज श्री ने बताया कि जब भगवान मधुबन आए, तो वे दर्शन देने नहीं, बल्कि अपने भक्त का दर्शन करने आए थे।

  जब ध्रुव जी ने नेत्र खोले तो वही स्वरूप, जो वे हृदय में देख रहे थे, सामने खड़ा था — स्वयं भगवान श्रीहरि नारायण।यह सुनते ही कथा स्थल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।महाराज श्री ने भक्तों को संदेश दिया —ध्यान, श्रद्धा और निष्ठा — यही सच्ची तपस्या है। जब मन का समर्पण पूर्ण हो जाता है, तब स्वयं भगवान भक्त के सामने प्रकट हो जाते हैं।”यजमान परिवार की भक्ति भावना रही विशेष आकर्षणइस दिव्य कथा के मुख्य यजमान श्री राज कपूर सिंह सापत्नी श्रीमती पुष्पा सिंह रहे।दोनों ने न केवल पूरे आयोजन की व्यवस्था संभाली बल्कि प्रतिदिन कथा श्रवण में पूर्ण आस्था और समर्पण के साथ उपस्थित रहे।उनके बड़े भाई राज बक्स सिंह ने भी अपने पूरे परिवार सहित कथा में सहभागिता कर धर्म सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया।यजमान परिवार के समर्पण, सेवा भावना और भक्ति ने पूरे आयोजन को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।महाराज श्री ने भी कथा के बीच में यजमान परिवार की सराहना करते हुए आशीर्वचन दिए और कहा —ऐसे श्रद्धालु परिवारों के कारण ही धर्म और कथा परंपरा जीवित रहती है। भगवान श्रीहरि ऐसे यजमानों के घर सदा मंगल बरसाएं।”कथा आयोजन में अवधेश पुरोहित, सुमित पांडेय, भानु प्रताप, विनय मिश्रा, अंकित मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।

  संगीत में श्याम जी ने अपने तबला वादन से ऐसा भक्ति रस वातावरण में घोला कि पूरा पंडाल “हरे कृष्ण हरे राम” के जयघोषों से गूंज उठा।कथा स्थल पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाबतीसरे दिन की कथा में अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।दीपों की रौशनी, पुष्प सज्जा और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर अलौकिक बना रहा।

  महाराज श्री के दिव्य वचनों के बीच भक्तजन कभी ध्यानमग्न तो कभी जयकारों में लीन दिखाई दिए।आयोजकों ने बताया कि कल कथा के चौथे दिन प्रह्लाद चरित्र एवं भगवान नरसिंह अवतार का अद्भुत प्रसंग सुनाया जाएगा।अयोध्या की यह सात दिवसीय कथा न केवल भक्ति का पर्व बनी है बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सेवा का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0