अम्बेडकरनगर: दरवन झील: करोड़ों की विकास योजनाओं के बावजूद बदहाली की आंसू बहा रही
जनपद की जीवनरेखा, घोटाले की आशंका से सिहर उठा जिला
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जिले में फैली 301 एकड़ की विशाल दरवन झील, जो कभी साइबेरियन पक्षियों का स्वर्ग और पर्यटकों का आकर्षण बिंदु थी, आज बदहाली की जिंदगी बिता रही है। प्रदेश सरकार की ओर से पौने पांच करोड़ रुपये की मंजूरी के बाद भी यहां का विकास अधर में लटका हुआ है।
पूर्व जिलाधिकारी अविनाश सिंह द्वारा शुरू की गई मुहिम के नाम पर करोड़ों की राशि खर्च होने का दावा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है—अधूरे टीले, टूटे झूले, जर्जर कॉटेज और पार्किंग स्थल। क्या यह सब सिर्फ एक सुनियोजित घोटाले का हिस्सा है? स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और जांच की मांग तेज हो रही है।दरवन झील, जो अयोध्या धाम से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित है, श्रद्धालुओं को पर्यटन की दृष्टि से आकर्षित करने का वादा लेकर सुर्खियों में आई थी।
2023 में डीएम अविनाश सिंह ने यहां पक्षी विहार के रूप में विकास की मुहिम छेड़ी, और शासन से विशेष बजट मंजूर कराया गया। मार्च 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, झील में स्टीमर और पैडल बोट चलाने, रंगीन लाइटिंग, बागवानी और पाथ-वे बनाने की योजना थी। फिर दिसंबर 2024 में ईको-टूरिज्म के तौर पर विकास को पांच करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, जिसमें पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये भी जारी हो चुके थे। कुल आठ करोड़ 33 लाख 55 हजार रुपये की प्रशासकीय मंजूरी का दावा किया गया, जिसमें गेस्ट हाउस, बंध निर्माण और मछली पालन को बढ़ावा देना शामिल था।लेकिन दो साल बाद भी झील का कायाकल्प कहीं नजर नहीं आ रहा।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यटन विभाग ने चार करोड़ 75 लाख रुपये से कई प्रमुख कार्य शुरू तो किए, एन टी पी सी ने भी दरवन झील के विकास के लिए फण्ड दिया था लेकिन कुछ पता नहीं चला कि फण्ड कहां खर्च किया गया,लेकिन सब अधूरे छोड़ दिए। "टीले न बने, बच्चों के झूले टूटे पड़े हैं, चार कॉटेजों का निर्माण आधा-अधूरा है, सीढ़ियां और पार्किंग स्थल जर्जर हाल में हैं," बताते हैं कटेहरी ब्लॉक के एक निवासी रामू यादव। "झील विकसित होने के बजाय तालाब की तरह सड़ रही है। न स्थानीय रोजगार बढ़ा, न पर्यटन फला-फूला। साइबेरियन समेत दुर्लभ प्रवासी पक्षी तो आते हैं, लेकिन अब उनका ठिकाना भी खतरे में है।"पूर्व डीएम अविनाश सिंह पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अविनाश सिंह ने झील और कायाकल्प तथा तमसा सफाई के नाम पर जिले को लूटा। कई बार सुंदरीकरण की आवाज उठी, लेकिन सार्थक नतीजा कभी नहीं निकला। अगर जांच बैठी तो घोटाले की सच्चाई सामने आ जाएगी।" जिला प्रशासन ने 2024 में एनजीटी के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने और कायाकल्प की योजना बनाई थी, लेकिन कार्यान्वयन में लापरवाही साफ झलक रही है। वर्तमान डीएम ने हाल ही में निरीक्षण का आदेश दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने माहौल गरमा दिया है।पर्यावरणविदों का कहना है कि दरवन जैसी प्राकृतिक झीलें न केवल जैव विविधता का खजाना हैं, बल्कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण का स्रोत भी। सर्दियों में यहां साइबेरियन क्रेन जैसी दुर्लभ प्रजातियां प्रवास करती हैं, जो पर्यटन को बढ़ावा दे सकती हैं। लेकिन अगर विकास की आड़ में लूट जारी रही, तो यह अम्बेडकरनगर की 'जीवनरेखा' मरुस्थल में बदल जाएगी। सरकार का फोकस इको-टूरिज्म पर था, लेकिन हकीकत में झील बदहाली के आंसू बहा रही है।अब सवाल उठ रहा है—क्या शासन इस पर त्वरित जांच कराएगा? या करोड़ों की योजनाएं कागजों तक सीमित रहेंगी?
स्थानीय विधायक और पर्यटन विभाग से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अम्बेडकरनगर के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह मुद्दा विधानसभा में गूंजे और सच्चाई उजागर हो। वरना, अयोध्या के वैभव के साये में दरवन झील की कहानी सिर्फ एक दर्दनाक चेतावनी बनकर रह जाएगी।
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