अंबेडकर नगर: जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का काला साया , अध्यक्ष पर झूठे शपथ पत्र का मामला ठंडा नहीं पड़ा
- तब तक घोटाले की लम्बी लिस्ट 97 विकास कार्यों पर TAC की जांच में, करोड़ों की अनियमितताओं का खुलासा तय
अंबेडकर नगर, अचल वार्ता। जिला पंचायत अध्यक्ष की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष साधू वर्मा (श्याम सुंदर वर्मा) के खिलाफ झूठे शपथ पत्र का मामला अभी धूल चाट रहा है, उधर विभाग के 97 बड़े विकास कार्यों पर तकनीकी सम्प्रीक्षा प्रकोष्ठ (TAC) की सख्त निगाह पड़ गई है। कल, 26 अक्टूबर 2025 को TAC टीम जिला मुख्यालय पहुंचकर जांच शुरू करेगी। सभी
अधिकारियों-कर्मचारियों को उपस्थिति का सख्त निर्देश जारी – क्या यह योगी सरकार की 'शून्य सहनशीलता' नीति का असली इम्तिहान है, या राजनीतिक दबाव में सेटलमेंट की आहट?
झूठे शपथ पत्र का पुराना जख्म: चुनावी धोखाधड़ी का आरोप
जिला पंचायत अध्यक्ष पर संकट जुलाई-अक्टूबर 2025 के बीच सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्ट्स में उठा हंगामा अब भी जिंदा है। 2021 के जिला पंचायत चुनाव में नामांकन पत्र (हलफनामा) में 2018 का SC-ST एक्ट के तहत दर्ज आपराधिक मुकदमा छिपाने का गंभीर आरोप लगा।
शिकायतकर्ता ने टांडा कोतवाली में तहरीर देकर कहा कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। आरोप साबित होने पर साधू वर्मा की सदस्यता रद्द हो सकती हो, और विभागीय कार्यों पर सवालों का सिलसिला शुरू। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हाल ही में साधू वर्मा से भेंट की थी, लेकिन मामला शांत होने के बजाय और गहरा गया।
स्थानीय कार्यकर्ता फुसफुसा रहे हैं – क्या यह BJP की आंतरिक कलह है, या विपक्ष की चाल?
97 विकास कार्यों पर TAC की केंद्रीय जांच:
अनियमितताओं की बौछार संभवअब नया मोड़! जिला पंचायत के 97 विकास कार्य – जिनमें ग्रामीण सड़कें, हैंडपंप, सामुदायिक भवन और स्वच्छता योजनाएं शामिल हैं – पर TAC टीम 26 अक्टूबर को धरातल पर उतरेगी। प्राविधिक परीक्षक (TAC) ने विभाग के सभी अधिकारियों, जूनियर इंजीनियरों और ठेकेदारों को अनिवार्य उपस्थिति का फरमान सुनाया है। स्रोतों के मुताबिक, ये कार्य करोड़ों के हैं, और प्रारंभिक शिकायतों में घटिया सामग्री, अतिरिक्त बिलिंग और फर्जी माप का खेल सामने आया है। TAC की जांच में यदि अनियमितताएं पाई गईं, तो फंडिंग रोकने से लेकर FIR तक की नौबत आ सकती है। जिला पंचायत राज विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार, अंबेडकर नगर में पंचायती राज योजनाओं पर पिछले साल 200 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ, लेकिन ग्रामीणों की शिकायतें कम नहीं हुईं।
क्या साधू वर्मा के नेतृत्व में ये कार्य 'विकास' के नाम पर लूट का जरिया बने?
विभाग की बढ़ती मुश्किलें: राजनीतिक तूफान की आहट झूठे शपथ पत्र का केस अभी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा है, और अब TAC जांच ने जिला पंचायत को हिलाकर रख दिया। स्थानीय BJP नेता साधू वर्मा पर दबाव बढ़ रहा है – एक तरफ उपमुख्यमंत्री की मुलाकातें (सितंबर-अक्टूबर 2025),
दूसरी तरफ विपक्षी दलों की आलोचना। ग्रामीण मतदाता नाराज: "विकास के नाम पर सिर्फ कागजी कारनामा!" एक प्रभावित गांववासी ने कहा। जिला प्रशासन ने जांच को पारदर्शी बताया, लेकिन सवाल वही – कार्रवाई कब?
आगे क्या 2027 चुनाव पर असर ?
योगी आदित्यनाथ सरकार की 'भ्रष्टाचार मुक्त UP' की छवि पर यह दाग लग सकता है। यदि TAC रिपोर्ट में बड़ा घोटाला निकला, तो न केवल फंड्स रुकेंगे, बल्कि BJP की ग्रामीण पकड़ कमजोर पड़ सकती है। स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जांच वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ हो, और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। फिलहाल, 26 अक्टूबर का दिन अंबेडकर नगर के लिए निर्णायक साबित होगा। क्या साधू वर्मा बच पाएंगे, या यह विभागीय सिस्टम का पतन होगा?
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