अम्बेडकर नगर: ससुराल वालों के जुल्म से पति गुमशुदा, समझौते की शर्तें तोड़ीं तो न्याय के दरवाजे बंद... दो मासूम बेटियों संग दर-दर भटक रही पीड़िता
प्रशासन पर सवालों का पहाड़
जलालपुर,अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता ।सरकार 'नारी सम्मान' और 'महिला सशक्तिकरण' का दावा तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अम्बेडकरनगर जिले के थाना जलालपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत लाभपार की रहने वाली रेनू पत्नी राम अनुज प्रजापति चार साल से न्याय के लिए पुलिस-प्रशासन के चक्कर काट रही हैं। ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा, पति को गायब करने का गंभीर आरोप लगाने वाली रेनू को न तो पति का सुराग मिला, न ही रहने-खाने की गारंटी।
समझौते की शर्तें तोड़ने पर थाने में शिकायत की, तो पुलिस ने कोर्ट का हवाला देकर टाल दिया। बरसात के इन दिनों में दो मासूम बेटियोंहिमांशी और प्राची—के साथ खुले आसमान तले भीग रही रेनू की पीड़ा देखकर सवाल उठता है: आखिर कब मिलेगा न्याय? कब लौटेगा 'भगवान' बनकर चला गया पति?
शादी से शुरू हुई दर्द भरी दास्तां
रेनू की शादी 19 फरवरी 2017 को राम अनुज पुत्र राम सिंगार से हुई थी। शुरूआती दिन खुशहाल बीते, लेकिन जल्द ही ससुराल का नर्क जैसा माहौल बन गया। ससुर राम सिंगार प्रजापति, सास झाला देवी और देवर अजय प्रजापति पर रेनू ने लगाए गंभीर आरोप। उन्होंने बताया कि शादी के बाद दो बेटियों के जन्म के बाद ससुराल वाले बराबर मारपीट, अपमान और तंग करते रहे। "धीरे-धीरे जीवन दुखों का पहाड़ बन गया। वे मुझे घर से निकालने की धमकी देते, दहेज का बहाना बनाकर सताते," रेनू ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आंसू पोछे।सबसे बड़ा सदमा तब लगा जब चार साल पहले पति अनुज रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। रेनू का आरोप है कि ससुर राम सिंगार और देवर अजय ने ही राम अनुज को कहीं भगा दिया। "पूछने पर कोई जवाब नहीं देते। चार साल बीतने को हैं, लेकिन सुराग तक नहीं," उन्होंने कहा। बेबस मां दो बेटियों को गोद में लिए न्याय की गुहार लगाती फिर रही हैं।
समझौते में लिखी शर्तें, लेकिन अमल में धोखा
न्याय की तलाश में रेनू ने जहांगीरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। लंबी मशक्कत के बाद 16 अक्टूबर 2023 को थाने पर सुलह-समझौता हुआ।
समझौते की मुख्य शर्तें थीं:
1... नए मकान में एक कमरा: द्वितीय पक्ष प (रेनू) को एक कमरा सामान रखने के लिए देना होगा। रेनू अपना पूरा सामान रखकर ताला लगा देंगी।
दरवाजा लगाना: जिस कमरे में सामान रखा जाए, उसके दरवाजे 22 अक्टूबर 2023 तक द्वितीय पक्ष (ससुराल वाले) लगवाएंगे।
2...जमीन का हिस्सा: द्वितीय पक्ष 10 विस्वा जमीन रेनू को देगा।
गुमशुदगी की रिपोर्ट: रेनू स्थानीय थाने में पति की गुमशुदगी दर्ज कराएंगी।
समय सीमा: सभी शर्तें पति के लौटने तक मान्य रहेंगी। पुराना मकान द्वितीय पक्ष को सौंप दिया जाएगा।
लेकिन समझौता कागजों पर ही रह गया। रेनू ने बताया कि नए मकान में दिए गए कमरे में सामान रखा, लेकिन ससुर राम सिंगार, देवर अजय और सास दौला देवी ने ही ताला लगा दिया। "मैं उस कमरे में रह भी नहीं सकती, क्योंकि वे मुझे घुसने नहीं देते। पुराना मकान तो उन्होंने पहले ही ले लिया, लेकिन नया कमरा भी हमारा नहीं रहा," रेनू ने शिकायत की। सवाल उठता है—अगर पुराना मकान ससुराल वालों को दिया गया, तो नए मकान के उस एक कमरे पर रेनू का अधिकार किसका? ताला लगाने का हक किसे? देवर अजय को क्यों?
थाने पहुंचा मामला, लेकिन 'कोर्ट' का बहाना
समझौते का उल्लंघन होने पर रेनू ने थाना जलालपुर में शिकायत दर्ज कराई। थाने पर दोनों पक्षों को बुलाया गया, बातचीत हुई, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मीडिया से बातचीत में थाना अध्यक्ष ने कहा, "मामला कोर्ट में चल रहा है, गुजारा भत्ता का केस है। इसमें हम क्या कर सकते हैं?" रेनू का तर्क है कि अगर रहने-खाने की व्यवस्था न हो, तो गुजारा भत्ता की लड़ाई कैसे लड़ें? "बच्चों को लेकर बरसात में सड़कों पर भटक रही हूं। प्रशासन बेरहम कैसे हो गया?"
नारी सम्मान' का दावा, हकीकत में दर-दर भटकाव
यह मामला अम्बेडकरनगर जिले में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का आईना है। हाल ही में ही जिले में दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के कई केस सामने आए हैं, जहां पुलिस समझौते कराती है, लेकिन अमल नहीं करवाती। रेनू की तरह कई महिलाएं न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) के तहत संरक्षण आदेश का उल्लंघन दंडनीय है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नदारद।रेनू की आंखों में उम्मीद की किरण बाकी है: "कब मिलेगा न्याय? कब लौटेगा मेरा अनुज?" प्रशासन से मांग है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप हो—पति की तलाश तेज की जाए, समझौते की शर्तें लागू हों और महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण मिले। अन्यथा, 'नारी सम्मान' का नारा महज हवा-हवाई साबित होगा।
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