अम्बेडकर नगर : गाटा संख्या 1108-1113 पर पैमाइश हेरफेर, स्टे ऑर्डर तोड़ बैनामा! क्या प्रशासन सो रहा है?
अचल वार्ता,अम्बेडकर नगर। उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर जिले के तहसील टांडा क्षेत्र में भूमि विवाद ने अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का रूप ले लिया है। गाटा संख्या 1108 और 1113 को लेकर खाताधारकों का खून खौल रहा है। आरोप है कि राजस्व अधिकारियों ने पैमाइश में जानबूझकर हेरफेर किया, मुकदमे खारिज करा दिए और कोर्ट के स्थगन आदेश (स्टे) के बावजूद विवादित जमीन का बैनामा कर दिया। यह मामला न केवल स्थानीय किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका बोल रहा है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। क्या यह एक सुनियोजित साजिश है या फिर सिस्टम की लापरवाही? आइए, इस घोटाले की परतें खोलते हैं।
पैमाइश में धांधली: अधिकारियों का काला खेल
सूत्रों के मुताबिक, विवाद की जड़ विनय पाल पुत्र राम बचन पाल का गाटा संख्या 1113 पर दावा है। उन्होंने धारा 24 के तहत पैमाइश के लिए मुकदमा दायर किया था। लेकिन मुकदमा फाइनल होने से पहले ही नायब तहसीलदार और पूर्व कानूनगो ने गाटा 1108 की जमीन का एक हिस्सा कब्जा करवा दिया। इससे गुस्साए खाताधारकों ने शिकायत की, जिसके बाद अधिकारियों का ट्रांसफर तो हो गया, लेकिन घाव गहरा हो चुका था।फिर गाटा संख्या 1108 के खाताधारकों ने धारा 24 कर पैमाइश की मांग की। जिम्मेदारी मिली कानूनगो रामनारायन गौड़ और नायब तहसीलदार को। लेकिन खाताधारकों का दावा है कि पैमाइश का नाटक बार-बार रचा गया। अंत में, नक्शे को जानबूझकर बड़ा दिखाकर दोनों गाटों के मुकदमे खारिज कर दिए गए। "मौके पर पैमाइश हुई, लेकिन रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति छिपाई गई। नक्शा बढ़ा-चढ़ाकर बनाया गया ताकि हमारा हक छिन जाए," एक प्रभावित 1108 खाताधारक संगीन आरोप यह भी है कि घूस लेकर । पूर्व कानूनगो और वर्तमान कानूनगो रामनारायन गौड की रिपोर्टों में जमीन के आकार व सीमाओं में भारी अंतर दिखाया गया , जो मामले को और संदिग्ध बना रहा है। क्या यह महज गलती है या साजिश? स्थानीय किसान चिल्ला रहे हैं कि उनकी जमीन पर अधिकारियों का कब्जा जम गया है।
स्टे ऑर्डर का अपमान: बैनामा कैसे हुआ संभव?
विवाद का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब गाटा संख्या 1113 पर खुद विनय पाल ने दीवानी न्यायालय से स्थगन आदेश ले रखा था। कोर्ट ने साफ तौर पर जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। लेकिन इसी बीच गायत्री देवी ने तीसरे पक्ष के नाम पर बैनामा कर दिया! खाताधारक हैरान हैं: "स्टे था तो बैनामा कैसे हो गया? दस्तावेजों में झूठा दावा किया गया कि जमीन पर कोई मुकदमा नहीं चल रहा।"और तो और, चौहद्दी (सीमाएं) भी संदिग्ध तरीके से बदली गईं। पहले गाटा 1113 को अकबरपुर-बसखारी राज्य राजमार्ग-30 के किनारे गलत तरीके से दिखाया गया, बाद में संशोधन कर गाटा 1108 के पीछे स्थानांतरित कर दिया। यह हेरफेर न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है। क्या रजिस्ट्री कार्यालय में भी मिलीभगत थी? प्रभावित पक्ष ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की खामोशी: न्याय की उम्मीद मिट रही?
स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। "इतने बड़े घोटाले में धोखाधड़ी, हेरफेर और कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन हो रहा है, फिर भी प्रशासन सोया हुआ है। क्या प्रभावशाली लोग इसमें लिप्त हैं?" एक ग्रामीण ने कहा। अम्बेडकरनगर जैसे जिले में, जहां राम मनोहर लोहिया की जन्मभूमि होने का गौरव है, ऐसी घटनाएं लोकतंत्र की जड़ें हिला रही हैं। खाताधारक अब उच्च न्यायालय का रुख करने की तैयारी में हैं।प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है। जिलाधिकारी से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। क्या यह मामला ठंडे बस्ते में जाएगा या न्याय मिलेगा? अम्बेडकरनगर के किसान इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी आस्था कमजोर पड़ रही है। यह केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम पर विश्वास का संकट है।
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