मथुरा : धर्मनगरी में खाकी का ‘कमीशन खेल’ , रिश्वत न मिलने पर दरोगा को आया गुस्सा, गरीब की टिर्री की सीज

मथुरा के होली गेट पर पुलिस पर ई-रिक्शा चालक से रिश्वत मांगने का आरोप। पैसे न देने पर वाहन सीज किए जाने के मामले ने खाकी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

May 12, 2026 - 22:01
May 12, 2026 - 22:02
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मथुरा : धर्मनगरी में खाकी का ‘कमीशन खेल’ , रिश्वत न मिलने पर दरोगा को आया गुस्सा, गरीब की टिर्री की सीज

मथुरा, अचल वार्ता। धर्मनगरी मथुरा के व्यस्त इलाके होली गेट से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि चेकिंग के दौरान एक गरीब ई-रिक्शा (टिर्री) चालक से कथित तौर पर अवैध वसूली की कोशिश की गई और पैसे न देने पर उसका वाहन सीज कर दिया गया।

 क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि होली गेट क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों ने चेकिंग के दौरान एक ई-रिक्शा चालक को रोका। आरोप है कि चालक को छोड़ने के बदले उससे ₹1500 की मांग की गई।

जब चालक ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए रकम देने में असमर्थता जताई, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान मौके पर मौजूद मीडियाकर्मी ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाए।

 मीडिया हस्तक्षेप के बाद बढ़ा विवाद

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मीडिया के सवालों के बाद मौके पर मौजूद दरोगा ने खुद को अलग करते हुए आरोप सिपाहियों पर डाल दिया। हालांकि मामला यहीं शांत नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इसके बाद कथित तौर पर मांग की गई रकम बढ़ाकर ₹2500 कर दी गई। जब चालक इतनी राशि नहीं दे पाया, तो पुलिस ने उसका ई-रिक्शा सीज कर दिया।

चयनात्मक कार्रवाई के आरोप

घटना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कुछ लोगों का आरोप है कि उसी दौरान पकड़े गए अन्य वाहनों को कथित रूप से “सुविधा शुल्क” लेकर छोड़ दिया गया, जबकि गरीब चालक पर सख्ती दिखाई गई।

 बड़े सवाल खड़े

यह मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं—

  • क्या पुलिस वाकई चेकिंग के नाम पर वसूली कर रही है?
  • गरीब और कमजोर लोगों पर ही कार्रवाई क्यों?
  • क्या उच्च अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे?

कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम जनता का भरोसा कायम रह सके।

मथुरा जैसे धार्मिक और संवेदनशील शहर में इस तरह के आरोप न केवल पुलिस की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि शासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

 अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

- आलोक तिवारी 

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