बीएसए कॉलेज प्रकरण में सीमित राहत, एसटीएफ जांच और वित्तीय अनियमितताओं पर कार्रवाई जारी
बीएसए कॉलेज मथुरा वित्तीय अनियमितता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की राहत केवल संबंधित याचिकाकर्ता तक सीमित है। एसटीएफ जांच, ऑडिट, भूमि विवाद और करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई जारी है।
मथुरा, अचल वार्ता। बी०एस०ए० (पी०जी०) कॉलेज, मथुरा से जुड़े बहुचर्चित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित हालिया आदेश के बाद विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि कानूनी जानकारों के अनुसार न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम राहत केवल वर्तमान रिट याचिका में शामिल याचिकाकर्ता तथा 08 नवंबर 2025 के उसके नोटिस तक सीमित है। पूरी एसटीएफ जांच, सरकारी ऑडिट कार्यवाही अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
सूत्रों के अनुसार एस टी एफ फील्ड यूनिट, आगरा द्वारा कई पदाधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए थे। वर्तमान आदेश केवल उस व्यक्ति से संबंधित है जिसने उक्त नोटिस को न्यायालय में चुनौती दी है। अन्य मामलों एवं अन्य व्यक्तियों के संबंध में वैधानिक स्थिति पूर्ववत प्रभावी रहेगी।
न्यायालय ने केवल याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी जैसी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई है। साथ ही राज्य सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उच्च न्यायालय स्वयं यह टिप्पणी कर चुका है कि प्रबंध समिति के विरुद्ध गंभीर आरोप हैं, जो आगे चलकर दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकते हैं। न्यायालय ने लंबित जांचों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाने की अपेक्षा भी व्यक्त की थी।
एसटीएफ जांच आख्या दिनांक 19 फरवरी 2026 में वित्तीय अनियमितताओं, शासन निधि के दुरुपयोग एवं वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति का उल्लेख किया जा चुका है। न्यायालय ने न तो उक्त जांच को निरस्त किया है और न ही किसी को क्लीन चिट प्रदान की है।
महाविद्यालय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार विभिन्न सरकारी ऑडिट रिपोर्टों एवं जांचों में यह भी प्रश्नगत पाया गया है कि बीएसए कॉलेज की सार्वजनिक/एडेड भूमि का विभाजन कर इंजीनियरिंग संस्थान के नाम पर पृथक शिक्षण संस्थान एवं अलग प्रबंधतंत्र संचालित किया गया। इस प्रकरण को गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं की श्रेणी में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार किशोर कुमार अग्रवाल उर्फ कोयला वाले, विनोद गर्ग तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न स्तरों पर जांच, ऑडिट व धारा 12-D की कार्यवाही एवं अन्य प्रशासनिक/वैधानिक प्रक्रियाएं अभी भी जारी हैं। करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं एवं शासन निधि के दुरुपयोग से संबंधित मामलों में रिकवरी एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई भी शासन स्तर पर प्रचलित है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान आदेश को “क्लीन चिट” के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक होगा, क्योंकि मामले में जांच, ऑडिट एवं अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं अभी भी जारी हैं।
- आलोक तिवारी
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