भारत–यूएई शिखर वार्ता: 5 समझौतों पर हस्ताक्षर, 7 बड़े ऐलान
भारत–यूएई शिखर वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद के बीच 5 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और डिफेंस, स्पेस, ऊर्जा, AI व फूड सिक्योरिटी पर 7 बड़े ऐलान किए गए।
डिफेंस, स्पेस, ऊर्जा, AI और फूड सिक्योरिटी में सहयोग को मिली नई गति
नई दिल्ली, अचल वार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इस उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में 5 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि 7 बड़े नीतिगत ऐलान भी सामने आए।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस दौरे को छोटा लेकिन बेहद ठोस बताया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद के बीच प्रतिबंधित स्तर और प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत बातचीत हुई।
डिफेंस और स्पेस में रणनीतिक साझेदारी
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क विकसित करने हेतु आशय पत्र (LoI) पर हस्ताक्षर किए।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए दो लॉन्च सुविधाओं और सैटेलाइट निर्माण से जुड़े समझौते भी हुए।
ऊर्जा सुरक्षा और न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस
यूएई अब भारत को हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति करेगा, जिससे वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बन गया है।
इसके साथ ही, दोनों देशों ने नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई।
गुजरात के धोलेरा SIR में यूएई निवेश
यूएई, गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) के विकास में भी भागीदारी करेगा, जिससे औद्योगिक और तकनीकी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक निवेश, AI और डेटा एंबेसी
- यूएई भारत में डेटा सेंटर क्षमता और सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर में निवेश करेगा।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सहयोग का प्राथमिक क्षेत्र घोषित किया गया।
- दोनों देश डेटा एंबेसी स्थापित करने की संभावना पर भी काम करेंगे।
फूड सिक्योरिटी और किसानों को लाभ
खाद्य सुरक्षा से जुड़े एमओयू से भारतीय किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं यूएई की फूड सिक्योरिटी भी मजबूत होगी।
सांस्कृतिक विरासत और भारतीय प्रवासी
यूएई में रह रहे 45 लाख भारतीयों के लिए अबू धाबी में “हाउस ऑफ इंडिया” की स्थापना की जाएगी, जो दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगा।
आतंकवाद और क्षेत्रीय शांति पर साझा रुख
दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने पर जोर दिया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया और अफ्रीका में शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने तथा युवाओं के आदान-प्रदान और निर्यात वृद्धि पर सहमति बनी।
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