अयोध्या: शंकराचार्य विवाद के बीच GST डिप्टी कमिश्नर का इस्तीफा, बोले– “सीएम योगी का अपमान बर्दाश्त नहीं”
शंकराचार्य विवाद के बीच अयोध्या में GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपमान का विरोध करते हुए राज्यपाल को इस्तीफा भेजा। पढ़िए पूरी खबर।
अयोध्या, अचल वार्ता। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या, जहां सदियों से धर्म, संस्कार और मर्यादाओं की परंपरा रही है, वहां इस बार न कोई आंदोलन हुआ, न धरना बल्कि एक इस्तीफा सामने आया, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। शंकराचार्य विवाद के बीच जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र देकर एक बड़ा संदेश दिया है।
डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल को दो पन्नों का इस्तीफा भेजते हुए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी से वे गहराई से आहत हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ किसी व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनादेश का अपमान है।
“जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, उसी का पक्षधर हूं”
अपने इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने लिखा है—
- “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, जहां से मुझे वेतन मिलता है, मैं उसी प्रदेश और उसके लोकतांत्रिक नेतृत्व का पक्षधर हूं।”
यह कोई औपचारिक प्रशासनिक बयान नहीं, बल्कि अंतरात्मा से निकली आवाज़ मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई दिनों से मानसिक रूप से व्यथित थे और अंततः आत्मसम्मान के आधार पर यह निर्णय लिया।
“सीएम योगी लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मुख्यमंत्री”
डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री हैं, और उनका अपमान वे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकते। उनके अनुसार यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत विचारधारा का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान का है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
एक सेवारत वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस तरह सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना दुर्लभ माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह घटना केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र के भीतर उठते असंतोष और वैचारिक टकराव की ओर भी इशारा करती है।
अयोध्या से उठा सख्त संदेश
रामनगरी अयोध्या से उठी यह आवाज़ अब प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। यह देखना अहम होगा कि शासन-प्रशासन इस घटनाक्रम को किस तरह लेता है और आगे क्या रुख अपनाता है।
- ब्यूरो रिपोर्ट
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