अम्बेडकर नगर: “विकास के नाम पर लूट का खेल”

Oct 15, 2025 - 13:40
Nov 10, 2025 - 16:15
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अम्बेडकर नगर: “विकास के नाम पर लूट का खेल”

बिशुनपुर में प्रधान-सचिव की जोड़ी ने उड़ाए लाखों,!

आलापुर ,अंबेडकरनगर, अचल वार्ता।उत्तर प्रदेश सरकार ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ का दावा चाहे जितना ठोक ले, लेकिन अंबेडकरनगर जनपद की धरती पर सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। विकास खंड जहांगीरगंज की ग्राम पंचायत बिशुनपुर में सरकारी धन के बंदरबांट का ऐसा मामला सामने आया है जिसने डबल इंजन सरकार के “विकास के घोड़े” को पंगु बना दिया है। ग्राम पंचायत की प्रधान और सचिव मांडवी उपाध्याय पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी खजाने को “अपनी निजी तिजोरी” समझ लिया — हैंडपंप मरम्मत और चूना-ब्लीचिंग के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी कर दी, जबकि गांव अब भी गंदगी, कीचड़ और मलेरिया की गिरफ्त में तड़प रहा है।

“41 हैंडपंप मरम्मत” का झूठा खेल! 

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कई इंडिया मार्का हैंडपंप वर्षों से सूखे पड़े हैं, लेकिन ग्राम सचिव ने 41 हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर लगभग ₹10 लाख का बिल पारित कर दिया! न कोई मरम्मत, न पानी की एक बूंद — सब कुछ सिर्फ “कागजों पर विकास” का खेल।

इसी तरह, चूना-ब्लीचिंग छिड़काव के नाम पर ₹1.17 लाख की धनराशि भी पिछले आठ महीनों में निकाल ली गई, जबकि गांव की गलियों में कभी छिड़काव तक नहीं हुआ।

चार सालों में इसी मद में लाखों का ‘वारा-न्यारा’ हो चुका है। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा,

कागजों पर तो बिशुनपुर चमक रहा है,

लेकिन जमीन पर हम गंदगी में जी रहे हैं!”

बिशुनपुर की गलियां आज ‘स्वच्छ भारत’ नहीं, बल्कि ‘गंदगी के साम्राज्य’ की गवाही दे रही हैं। नालियां जाम, गलियां कीचड़ से भरीं और सड़कों पर कूड़े के ढेर “विकास के प्रतीक” बन चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान-सचिव की जोड़ी सिर्फ “पेपर पर परफेक्ट गांव” बनाकर शासन को गुमराह कर रही है।

 “पंचायत साइड” पर फर्जी विकास का डेटा!

ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्टाचार की ये पूरी कहानी ‘पंचायत साइड ऐप’ पर दर्ज है। फर्जी प्रोजेक्ट्स और झूठे बिलों की लिस्ट देखकर ग्रामीण दंग रह जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह एक “ऑनलाइन फंड घोटाला” है — पैसा आता है, काम नहीं होता, और सरकारी खजाना खाली हो जाता है। जब इस पूरे मामले पर खंड विकास अधिकारी सतीश कुमार सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो संपर्क नहीं हो सका। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि

 “ऑनलाइन पोर्टल पर मौजूद वित्तीय डिटेल्स के आधार पर

 उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।” 

ग्राम सचिव मांडवी उपाध्याय पर पहले भी लगे थे गमन के आरोप! 

सचिव मांडवी उपाध्याय का विवादों से पुराना नाता रहा है। टांडा क्षेत्र में भी इनके ऊपर गमन व भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, और अब जहांगीरगंज में भी वही खेल जारी है। ग्रामीणों ने कहा कि “ये अधिकारी सरकार के भरोसे पर कलंक हैं, जो जनता के हक का पैसा लूटकर हंस रहे हैं।”

ग्रामीणों की पुकार:

 “सरकार कहती है अमृत भारत,

लेकिन यहां तो ‘भ्रष्ट भारत’ का चेहरा दिख रहा है!”

बिशुनपुर के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि जांच टीम गठित कर पूरे वित्तीय लेन-देन की जांच कराई जाए। अन्यथा ग्राम पंचायतें “विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला” बनती चली जाएंगी। बिशुनपुर की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन हजारों गांवों की झलक है जहां विकास के नाम पर फंड उड़ाए जा रहे हैं और जनता धोखे में जी रही है। अगर शासन-प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाया, तो “विकास का सपना” हमेशा भ्रष्टाचार के बोझ तले दबा रहेगा।

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