आधी रात को क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी? आख़िर क्या है इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण

Aug 11, 2025 - 22:48
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आधी रात को क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी? आख़िर क्या है इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण

कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व है, जो आधी रात को मनाया जाता है। भक्त इस समय पूजा करते हैं और भगवान को नए वस्त्र पहनाते हैं। यह समय परंपरा और आध्यात्मिकता से जुड़ा है।

जन्माष्टमी, भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व, हिंदू धर्म के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक है। लेकिन जहां ज्यादातर त्योहार सुबह या दिन में शुरू होते हैं, वहीं जन्माष्टमी का मुख्य पल गहरी रात यानी आधी रात में मनाया जाता है। यह समय केवल परंपरा नहीं, बल्कि पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिकता से जुड़ा है, क्योंकि भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी आधी रात को?

भागवत पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात के समय हुआ था। उनका जन्म मथुरा में हुआ, उस समय उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव मथुरा के अत्याचारी राजा कंस द्वारा कैद में रखे गए थे।

कंस ने एक भविष्यवाणी सुनी थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। डर के कारण उसने देवकी और वसुदेव को कैद कर लिया और उनके पहले सात बच्चों की हत्या कर दी।

जब आठवें पुत्र कृष्ण का जन्म हुआ, तब वसुदेव ने उन्हें टोकरी में रखकर तेज बहाव वाली यमुना नदी पार की और गोकुल पहुंचा दिया, जहां नंद और यशोदा ने उन्हें अपने बेटे की तरह पाला। आधी रात का यह क्षण अंधकार के बीच प्रकाश के आगमन का प्रतीक है जैसे सबसे गहरी रात में रोशनी का जन्म हुआ।

जानिए इसका आध्यात्मिक महत्व

आधी रात गहरी शांति का समय माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, यह वह घड़ी होती है जब बाहरी दुनिया शांत होती है और अंदर का आत्मिक संसार जागृत होता है। योग दर्शन में इसे रात का ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है, जब आध्यात्मिक ऊर्जा सबसे अधिक होती है। भक्त मानते हैं कि इस समय ध्यान करना, भजन गाना या पूजा करना, भगवान कृष्ण से गहरी जुड़ाव महसूस कराता है।

इसी कारण भारत के मंदिरों और विश्वभर के इस्कॉन केंद्रों में मुख्य पूजा आधी रात को होती है। इस समय बाल गोपाल का अभिषेक (स्नान) कराया जाता है, उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और झूले में विराजमान किया जाता है।

भक्त दिनभर का व्रत तोड़ते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं, जैसे मानो दिव्य बालक का स्वागत अपने घर में कर रहे हों। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी शनिवार, 16 अगस्त को मनाई जाएगी। इस साल चंद्र कैलेंडर के कारण 15 और 16 अगस्त दोनों तारीखों पर अष्टमी पड़ रही है, जिस वजह से तारीख को लेकर थोड़ी उलझन रही।

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