भारत को रूस का ऑफर: सुपरजेट-100 और एमसी-114-300 यात्री विमान, विंग्स इंडिया 2026 में प्रदर्शन

रूस ने भारत के सामने अपने स्वदेशी यात्री विमान सुपरजेट-100 और एमसी-114-300 का प्रस्ताव रखा है। पूरी तरह रूसी तकनीक से बने ये विमान विंग्स इंडिया 2026 में प्रदर्शित होंगे। जानिए भारत-रूस एविएशन सहयोग की पूरी जानकारी।

Jan 25, 2026 - 22:39
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भारत को रूस का ऑफर: सुपरजेट-100 और एमसी-114-300 यात्री विमान, विंग्स इंडिया 2026 में प्रदर्शन

मॉस्को, अचल वार्ता।

रूस ने भारत की तेजी से बढ़ती एविएशन इंडस्ट्री को ध्यान में रखते हुए अपने दो स्वदेशी यात्री विमानों सुपरजेट-100 और एमसी-114-300 का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि ये दोनों विमान पूरी तरह रूसी तकनीक से विकसित हैं और पश्चिमी देशों के पुर्जों पर निर्भर नहीं हैं। रूस का मानना है कि यह पेशकश भारत के लिए तकनीकी विविधता और सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने का बड़ा अवसर बन सकती है।

भारत को आकर्षित करने के लिए रूस ने इन विमानों पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाला विशेष डिजाइन भी तैयार किया है। इसे केवल व्यापारिक सौदे से आगे बढ़कर भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो रक्षा और तकनीकी सहयोग के बाद दोनों देशों के बीच पैसेंजर एविएशन सेक्टर में भी नया अध्याय जुड़ सकता है।

विंग्स इंडिया 2026 में होगा प्रदर्शन

रिपोर्ट के अनुसार, रूस के उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने सुपरजेट-100 के इंटीरियर का वीडियो जारी किया है, जिसमें नया पीडी-8 जेट इंजन लगाया गया है। यह विमान विंग्स इंडिया 2026 प्रदर्शनी में स्टैटिक डिस्प्ले पर रखा जाएगा। वहीं, यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन पहली बार अपने नए क्षेत्रीय विमान एमसी-114-300 को इसी आयोजन में पेश करेगी, जहां यह उड़ान प्रदर्शन का हिस्सा भी बनेगा।

एमसी-114-300 में टीवी7-117एसटी-01 टर्बोप्रॉप इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जबकि सुपरजेट-100 में आधुनिक पीडी-8 जेट इंजन लगाया गया है। दोनों इंजन पूरी तरह रूस में विकसित किए गए हैं।

उड़ान योजना और मेक इन इंडिया से जुड़ी उम्मीदें

रूसी रक्षा और औद्योगिक समूह रोस्टेक का कहना है कि इन विमानों की डिजाइन और तकनीक उन देशों के लिए खास तौर पर उपयोगी है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों या सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। रूस का मानना है कि भारत की उड़ान योजना और मेक इन इंडिया पहल इन विमानों के लिए बड़ा बाजार तैयार कर सकती है।

उड़ान योजना का लक्ष्य छोटे शहरों और दूरदराज इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है, जहां क्षेत्रीय विमानों की मांग लगातार बढ़ रही है। फिलहाल भारतीय एयरलाइंस का झुकाव बोइंग और एयरबस जैसे पश्चिमी निर्माताओं की ओर है, लेकिन रूस का तर्क है कि उसके विमान भारत को लागत, तकनीकी विकल्प और दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

सुरक्षा और रखरखाव होंगे अहम

हालांकि, भारतीय बाजार में इन विमानों की स्वीकार्यता सुरक्षा मानकों, रखरखाव व्यवस्था और आर्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये विमान भारतीय एविएशन रेगुलेटर्स की कसौटी पर खरे उतरते हैं, तो क्षेत्रीय उड़ानों में यह एक मजबूत विकल्प बन सकते हैं।

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