भारत बनाम चीन: कैसे 1980 के बाद बदली आर्थिक तस्वीर, प्रति व्यक्ति आय में इतना बड़ा अंतर क्यों?
1980 के दशक में India कई आर्थिक मानकों पर China से आगे था, लेकिन 1978 के आर्थिक सुधारों के बाद चीन ने तेज़ी से मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस कर बड़ी छलांग लगा दी,आज चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से कई गुना अधिक है। जानिए कैसे बदली दोनों देशों की आर्थिक तस्वीर।
नई दिल्ली, अचल वार्ता
आज China दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका बेहद अहम है। लेकिन कुछ दशक पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। 1980 के दशक में चीन बेहद गरीब देशों की श्रेणी में गिना जाता था, जबकि कई आर्थिक मानकों पर India उससे आगे था,तो फिर ऐसा क्या हुआ कि चीन ने तेज रफ्तार पकड़ ली और भारत पीछे रह गया? आइए समझते हैं पूरी कहानी।
1980 में भारत आगे, चीन पीछे
विश्व बैंक के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार:
- 1980 में चीन की प्रति व्यक्ति आय: लगभग 307 डॉलर
- 1980 में भारत की प्रति व्यक्ति आय: लगभग 582 डॉलर
यानी उस समय भारत की औसत आय, चीन से लगभग दोगुनी थी। चीन की तुलना कई अफ्रीकी देशों से की जाती थी।
1978 के आर्थिक सुधार:
- चीन की गेम चेंजर रणनीति
- 1978 में चीन ने बड़े आर्थिक सुधार लागू किए।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए
- कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार
- बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
- निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण
- तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
इन कदमों से कुछ ही वर्षों में ग्रामीण आय दोगुनी हो गई और औद्योगिक उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। 1990 के दशक तक चीन की जीडीपी विकास दर अक्सर 8% या उससे अधिक रही।
भारत ने कब उठाया कदम?
भारत में आर्थिक उदारीकरण 1991 में लागू हुआ। उस समय प्रधानमंत्री P. V. Narasimha Rao और वित्त मंत्री Manmohan Singh ने सुधारों की शुरुआत की।
हालांकि, भारत में राजनीतिक अस्थिरता और धीमी नीतिगत गति के कारण सुधारों का असर चीन जैसी तेज़ी से नहीं दिख पाया।
आज की स्थिति: बड़ा अंतर
ताज़ा उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के अनुसार:
- चीन की प्रति व्यक्ति आय: लगभग 13,800 डॉलर
- भारत की प्रति व्यक्ति आय: लगभग 2,800 डॉलर
रुपयों में देखें तो चीन की औसत सालाना आय भारत से कई गुना अधिक है।
चीन क्यों आगे निकल गया?
- मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा फोकस
- निर्यात-आधारित मॉडल
- तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
- दीर्घकालिक नीति स्थिरता
- बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करना
क्या भारत अंतर कम कर सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप इकोसिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग (मेक इन इंडिया), और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के जरिए भारत के पास तेज़ विकास का अवसर है।
आने वाले दशक तय करेंगे कि भारत और चीन के बीच आर्थिक दूरी कम होती है या और बढ़ती है।
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