रुदौली कोतवाल पर न्याय की अनदेखी का आरोप, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
रुदौली,अयोध्या। अयोध्या पुलिस के रुदौली थाने से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ कोतवाल संजय मौर्य पर पीड़ित परिवार ने न्याय न देने और मनमानी करने का आरोप लगाया है। यह घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जनता के साथ अच्छा व्यवहार' के निर्देशों पर सवाल खड़े करती है। पीड़ित परिवार का कहना है कि कोतवाल संजय मौर्य ने कानून की धज्जियाँ उड़ाई हैं और खुद को मुख्यमंत्री से भी ऊपर मानकर काम कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि आज के समय में इंसान खुद से अपराधी नहीं बनता, बल्कि पुलिस की मनमानी उसे अपराधी बनने पर मजबूर कर देती है। ऐसे में न्याय की उम्मीद किससे की जाए, जब पुलिस ही अपने को सही साबित करने पर तुली हो।
पुलिस से पाँच गंभीर सवाल...
गिरफ्तारी और चालान में देरी क्यों? यदि दोनों पक्षों को हिरासत में लिया गया था, तो तुरंत शांति भंग में चालान क्यों नहीं किया गया? शाम 5 बजे की घटना का चालान रात 9 बजे के बाद क्यों किया गया?
समझौते के बाद भी कार्रवाई क्यों? जब दोनों पक्षों में समझौता हो चुका था और आपको लिखित सुलाहनामा रात 8:30 बजे मिल गया था, उसके बाद भी चालान क्यों किया गया?
मोबाइल छीनने का अधिकार किसने दिया? सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख रहे व्यक्ति का मोबाइल किस कानून के तहत छीना गया?
शांतिपूर्ण तरीके से थाने के बाहर बैठे पारिवारिक जनो पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज क्यों किया गया? लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज करने का आदेश किसने दिया और किस आधार पर?
सीसीटीवी फुटेज की जांच क्यों नहीं? लाठीचार्ज हुआ या नहीं, मोबाइल छीना गया या नहीं, और शांति व्यवस्था का हवाला देकर कुछ लोगों को दोबारा अंदर डाला गया या नहीं, इसकी सच्चाई जानने के लिए बाहर बैठे लोगो के सामने और रुदौली कोतवाली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच क्यों नहीं हो रही? इन फुटेज से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।पीड़ित परिवार ने कोतवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने का दावा किया है और कहा है कि यह मामला अब मुख्यमंत्री के पास भी जाएगा। अगर वहाँ से न्याय नहीं मिला तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की तैयारी है। लोगों का कहना है कि कोतवाल संजय मौर्य पहले भी विवादों में रहे हैं और उन पर न्याय न करने और सुविधा सुल्क के प्रभाव में काम करने का आरोप लगता रहा है। अब जनता उनकी और उनके रिश्तेदारों की आय से अधिक संपत्ति की जांच की भी मांग कर रही है। अगर कोतवाल वाकई शांति व्यवस्था बनाए रखने में इतने अच्छे हैं, तो उन्हें तुरंत अपराधियों को पकड़ना चाहिए, बिना देरी के चालान करना चाहिए और अपराधियों पर तुरंत मुकदमा दर्ज करना चाहिए। तभी उनकी ईमानदारी साबित होगी। मुख्यमंत्री जी के आदेशों का पालन न करना और अपनी मनमानी चलाना लोकतंत्र की हत्या है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि पुलिस झूठे मुकदमे दर्ज करके लोगों को जेल में डाले। कानून सबके लिए बराबर है और कोतवाल को भी अपने हर काम का जवाब देना होगा।
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