अयोध्या : आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में किसानों को सिखाई गई प्राकृतिक खेती की तकनीक
मिल्कीपुर,अयोध्या, अचल वार्ता। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मंगलवार को पशुपालन विभाग की तरफ से गोरखपुर जनपद से आए 14 किसानों के भ्रमण दल ने कृषि वैज्ञानिकों से आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न तरीकों, कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए गए।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एसपी सिंह ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भी किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती से जहां उत्पादन लागत कम होती है, वहीं मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
डॉ. सिंह ने किसानों को घन जीवामृत तैयार करने की विधि विस्तार से समझाई। उन्होंने बताया कि एक कुंतल सड़ी गोबर की खाद में 20 लीटर जीवामृत मिलाकर उसे छांव वाले स्थान या पेड़ के नीचे ढककर रखा जाए तथा 10 दिन के अंतराल पर जीवामृत का छिड़काव किया जाए। इसके ऊपर पुआल डालकर ढकने से लगभग 40 दिनों में घन जीवामृत तैयार हो जाता है।
उन्होंने बताया कि एक एकड़ खेत के लिए लगभग 10 कुंतल सड़ी गोबर की खाद से घन जीवामृत तैयार किया जा सकता है। इसके प्रयोग से खेत में लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है तथा केंचुए सक्रिय होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान कम खर्च में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
भ्रमण दल में किसान संजय त्रिपाठी, राजकुमार, मनमोहन पांडे सहित अन्य किसान शामिल रहे। किसानों ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से खेती से जुड़े कई सवाल पूछे और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझा।
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