कागजों में विकास, हिसाब में ‘गबन’13.49 करोड़ की आरसी, 136 प्रधानों की कुर्सी पर वसूली का वार!

Sep 15, 2026 - 10:07
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कागजों में विकास, हिसाब में ‘गबन’13.49 करोड़ की आरसी, 136 प्रधानों की कुर्सी पर वसूली का वार!

 2011-12 से 2018-19 तक 136 ग्राम पंचायतों में बजट के दुरुपयोग का मामला, तीन बीडीओ, 13 सचिव और 136 पूर्व प्रधान घेरे में 

    अंबेडकरनगर। गांवों की गलियों में विकास की ईंटें भले कम दिखी हों, लेकिन कागजों पर खर्च का हिसाब देखकर सरकारी फाइलें जरूर मोटी हो गईं। वर्ष 2011-12 से 2018-19 तक जिले की 136 ग्राम पंचायतों में विकास बजट के कथित दुरुपयोग का मामला अब वसूली की चौखट तक पहुंच गया है। पंचायती राज विभाग ने करीब 13 करोड़ 49 लाख 46 हजार 55 रुपये की वसूली के लिए आरोपितों के खिलाफ आरसी जारी कर दी है। मामले में तीन खंड विकास अधिकारी, 13 सहायक विकास अधिकारी/तत्कालीन ग्राम सचिव और 136 पूर्व ग्राम प्रधान कार्रवाई के दायरे में हैं। जारी वसूली आदेश के अनुसार सचिवों से 6 करोड़ 43 लाख 85 हजार 982 रुपये, जबकि पूर्व ग्राम प्रधानों से 6 करोड़ 38 लाख 26 हजार 505 रुपये की वसूली की जानी है। यानी गांवों के विकास की रकम का हिसाब अब फाइलों से निकलकर आरसी के रास्ते तहसील तक पहुंच चुका है।

 सालों तक ऑडिट की ‘कुंभकरण नींद’, कई आरोपी दुनिया से हुए विदा

    इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ऑडिट और वसूली की प्रक्रिया में हुई वर्षों की देरी के बीच नौ सचिव और छह ग्राम प्रधानों की मौत हो चुकी है। यानी सरकारी फाइल जब जागी, तब कुछ आरोपित इस दुनिया से ही विदा हो चुके थे। वहीं दो एडीओ समेत 12 सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि 25 सचिव अभी भी सरकारी सेवा में कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर करोड़ों के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला वर्षों पहले सामने आया था तो कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही?

सचिवों की सूची भी लंबी, आरसी का हिसाब भी भारी

 आरोपित सचिवों में ईश्वरचंद्र वर्मा, पवारूराम, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, ज्ञान चंद्र श्रीवास्तव, श्याम बहादुर मिश्र, राणा प्रताप सिंह, बृजेश सिंह, देवप्रभाकर उपाध्याय और दुर्गेश कुमार समेत अन्य नाम शामिल हैं। इनमें कई आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है।पूर्व ग्राम प्रधानों में हनुमान प्रसाद, अशोक, रेशमा खातून, घनश्याम दुबे, फूलचंद और राधिका देवी के नाम शामिल हैं, जिनमें कई अब जीवित नहीं हैं।

 बीडीओ से एडीओ तक—‘विकास’ की फाइल में जिम्मेदारों की पूरी टीम!

मामले में बीडीओ श्याम नारायण, सेवानिवृत्त देवेंद्र प्रताप वर्मा और घनश्याम वर्मा के खिलाफ भी आरसी जारी हो चुकी है। वहीं एडीओ पद पर रहे अथवा वर्तमान में कार्यरत मनोज चौधरी, रवींद्र वर्मा, रविंद्र कुमार चौधरी, बृजेश सिंह, अरुण चतुर्वेदी, हंश प्रकाश सिंह, फिरदौस आलम, दुर्गाप्रसाद पांडेय, शैलेंद्र सिंह, अंगद यादव और प्रदीप दुबे के नाम भी कार्रवाई की सूची में हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त जगदंबा शुक्ल और बृजेश सिंह भी सूची में शामिल बताए गए हैं।

 दिवंगत से वसूली कैसे हो?’ विभाग के सामने बड़ा सवाल 

जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र पांडेय ने बताया कि दिवंगत आरोपितों से अब वसूली संभव नहीं है। शेष आरोपितों से धनराशि की वसूली की प्रक्रिया तेज की जा रही है। अब असली सवाल यह है कि गांवों के विकास के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का हिसाब आखिर कब पूरा होगा? सरकारी खजाने से निकला पैसा यदि विकास में लगा था तो आरसी की नौबत क्यों आई और यदि धन का दुरुपयोग हुआ तो कार्रवाई में इतने साल क्यों लगे! फाइलों की रफ्तार ने जहां वर्षों तक ‘कुंभकरण नींद’ का रिकॉर्ड बनाया, वहीं अब आरसी जारी होने के बाद विभाग के सामने चुनौती है।कागजी हिसाब को असली वसूली में बदला जाए और जनता का पैसा सरकारी खजाने में वापस पहुंचे।

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