अम्बेडकर नगर: चैम्बर हटते ही पांच साल पुराने कब्जे का मामला खत्म? तहसीलदार के आदेश पर उठे सवाल

Aug 19, 2026 - 22:02
Aug 20, 2026 - 09:05
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अम्बेडकर नगर: चैम्बर हटते ही पांच साल पुराने कब्जे का मामला खत्म? तहसीलदार के आदेश पर उठे सवाल

अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। आलापुर तहसील में चकमार्ग की सरकारी भूमि पर कथित वर्षों पुराने अतिक्रमण के मामले में तहसीलदार न्यायालय के आदेश पर सवाल उठे हैं। वाद संख्या 3638/2021, ग्रामसभा बनाम अब्दुल अजीज में तहसीलदार आलापुर पदमेश श्रीवास्तव ने 3 अगस्त 2026 को पूर्व की बेदखली और वसूली की कार्रवाई वापस ले ली।

मामला क्या है?

ग्राम हुसेनपुर मुसलमान की गाटा संख्या 495 में 0.0030 हेक्टेयर चकमार्ग भूमि से मामला जुड़ा है। आदेश के अनुसार, लेखपाल की रिपोर्ट में अब्दुल अजीज पर पक्का चैम्बर, पेड़ आदि के जरिए करीब पांच वर्ष से कब्जे की बात कही गई थी। इसके आधार पर 18,530 रुपये क्षतिपूर्ति और 700 रुपये निष्पादन व्यय लगाया गया तथा आरसी प्रपत्र-21 जारी हुआ।बाद में प्रतिवादी ने कब्जे से इनकार करते हुए स्थलीय जांच की मांग की। 1 जुलाई 2026 की रिपोर्ट में चैम्बर हटे होने की बात सामने आने पर तहसीलदार ने अवैध अतिक्रमण न होने का निष्कर्ष निकालते हुए पुरानी कार्रवाई वापस ले ली।

चैम्बर हटने से क्या पूर्व कब्जे की क्षतिपूर्ति भी खत्म हो जाती है?

सवाल यह उठता है कि वर्तमान में अतिक्रमण हट जाना और पूर्व में अतिक्रमण हुआ ही नहीं था, दोनों अलग बातें हैं। यदि वर्षों पुराने कब्जे का उल्लेख सरकारी अभिलेख में है तो केवल चैम्बर हटने के आधार पर पूर्व अवधि की क्षतिपूर्ति क्यों समाप्त की गई?

आदेश में तारीखों को लेकर भी सवाल

आदेश में 04.10.2024 की लेखपाल रिपोर्ट का उल्लेख है, जबकि उसी में 17.01.2023 को बेदखली और 18,530 रुपये क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात कही गई है। यह गंभीर कालक्रम संबंधी विसंगति है कि 17 जनवरी 2023 का आदेश आखिर किस रिपोर्ट और जांच के आधार पर पारित हुआ था?

स्थलीय जांच पर भी उठे सवाल

आपत्ति में 1 जुलाई 2026 की जांच में गाटा संख्या 495 की सीमांकन-पैमाइश, चकमार्ग की वास्तविक सीमा, मौके की फोटो/वीडियोग्राफी तथा पूर्व में मौजूद बताए गए चैम्बर के साक्ष्यों की जांच की गई या नहीं।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

तहसीलदार के आदेश की स्वतंत्र समीक्षा के साथ मूल पत्रावली, पुरानी लेखपाल रिपोर्ट, 17 जनवरी 2023 का आदेश, आरसी प्रपत्र-21 और 1 जुलाई 2026 की जांच रिपोर्ट का परीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही यदि पूर्व का अवैध कब्जा सिद्ध होता है तो पूर्व अवधि की देय क्षतिपूर्ति की पुनः गणना कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है।

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