आईएएस प्रशिक्षुओं से बोले उपराष्ट्रपति, ‘सेवा भाव और कर्तव्य बोध’ को बनाएं मंत्र

Aug 20, 2026 - 15:01
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आईएएस प्रशिक्षुओं से बोले उपराष्ट्रपति, ‘सेवा भाव और कर्तव्य बोध’ को बनाएं मंत्र

देहरादून , अचल वार्ता । उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं के द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन समारोह को संबोधित किया।

अधिकारी प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के विकास में सिविल सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवाएं नीति निर्माण और उसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

विकसित भारत @ 2047 की यात्रा का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास समावेशी हो। उन्होंने अधिकारियों से “सेवा भाव और कर्तव्य बोध” को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आह्वान किया।

टीमवर्क पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से व्यक्तिगत या समूहगत उपलब्धियों के बजाय टीम उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से मजबूत और समन्वित टीम बनाने, अपने सहयोगियों को प्रेरित करने तथा अपने पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित अच्छी कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि 2024 बैच में लगभग 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का प्रभावशाली प्रमाण बताया, जहां प्रतिभा रूढ़ियों से ऊपर उठती है और दृढ़ संकल्प बाधाओं को पार करता है।

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP), मशीन लर्निंग (ML) और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से कार्यकुशलता, पारदर्शिता और नागरिकों को सेवाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर जोर दिया।

लोक सेवा में चरित्र और ईमानदारी को आधारभूत तत्व बताते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान शक्ति या पद से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक तरीके से कार्य करने की क्षमता से होती है।

अपने संबोधन के समापन पर उपराष्ट्रपति ने अधिकारी प्रशिक्षुओं से अपनी सेवा को सार्थक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर शिकायत सुनी जाए और प्रत्येक नागरिक सशक्त बने।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, उत्तराखंड सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण तथा सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और एलबीएसएनएए के निदेशक डॉ. बी. राजेंद्र उपस्थित रहे।

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