घर पहुंचा बैंक अमला, मोबाइल कब्जे में लेकर हस्ताक्षर कराने का आरोप

Sep 20, 2026 - 18:58
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घर पहुंचा बैंक अमला, मोबाइल कब्जे में लेकर हस्ताक्षर कराने का आरोप

पुराना केसीसी ऋण चल रहा था, फिर दर्ज हुआ नया कर्ज—वृद्ध किसान ने उठाए सवाल, डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग

       आलापुर (अंबेडकरनगर) अचल वार्ता। बैंक ऋण की वसूली के लिए ग्राहक के घर तक बैंक अधिकारियों का पहुंचना भले ही बैंकिंग प्रक्रिया का हिस्सा हो, लेकिन जब घर पर ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जाने और उसके बाद ग्राहक के नाम पर नया ऋण दर्ज होने का आरोप लगे, तो बैंकिंग प्रक्रिया और ग्राहक की सहमति दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रामनगर विकासखंड के अरमा गांव निवासी वृद्ध किसान प्रेम प्रकाश पांडे ने यूपी ग्रामीण बैंक ऑफ बड़ौदा की हुसेनपुर खुर्द शाखा के अधिकारियों पर घर पहुंचकर दबाव बनाने, मोबाइल अपने पास रखने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद नया ऋण दर्ज किए जाने का आरोप लगाया है। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले की शिकायत सीपी ग्राम पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है, जिसका पंजीकरण नंबर GOVUP/E/2026/0121998 बताया गया है।

2017 से चल रहा था केसीसी ऋण

         शिकायत के अनुसार प्रेम प्रकाश पांडे का वर्ष 2017 से उक्त बैंक शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण संचालित है। शिकायतकर्ता ने ऋण खाता संख्या 58220500000312 बताई है। आर्थिक परेशानियों के चलते वह पुराने ऋण की समय से अदायगी नहीं कर पा रहे थे। इसी बीच 18 सितंबर 2026 को शाखा प्रबंधक करीब तीन लोगों के साथ उनके घर पहुंचे। किसान के मुताबिक साथ आए एक व्यक्ति को बैंक का डीसी/अधिकारी बताते हुए उसका नाम सर्वेश मिश्रा बताया गया।

रिश्तेदार को फोन करने की कोशिश, मोबाइल रखने का आरोप

         किसान का आरोप है कि बैंक अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की जानकारी देने के लिए अपने रिश्तेदार से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। इसी दौरान कथित रूप से उनका मोबाइल फोन अपने पास रख लिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक वह वृद्ध हैं और उस समय घर पर पत्नी के अलावा परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। आरोप है कि इसी परिस्थिति में उनसे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नए ऋण की प्रक्रिया नियमानुसार थी तो ग्राहक को यह स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया कि किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और उसके नाम पर नया ऋण किस आधार पर दर्ज किया जा रहा है?

पुराने कर्ज में रकम समायोजित करने की बताई गई बात

      शिकायतकर्ता के अनुसार हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर एक और ऋण किया जा रहा है और उसकी धनराशि पुराने ऋण खाते में जमा कर दी जाएगी। किसान का कहना है कि उन्हें नए ऋण की पूरी जानकारी, ऋण खाता संख्या तथा संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।19 सितंबर को जब वह बैंक में पुराने ऋण की किस्त जमा करने पहुंचे, तब उन्हें अपने नाम पर एक अन्य ऋण स्वीकृत/दर्ज होने की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने नए ऋण की खाता संख्या और उससे संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन शिकायत के मुताबिक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

बैंक में नहीं, घर पर हस्ताक्षर—उठे सवाल

     किसान ने अपने शिकायती पत्र में सवाल उठाया है कि नए ऋण से संबंधित दस्तावेजों पर उन्होंने बैंक शाखा में जाकर हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि घर पर ही हस्ताक्षर कराए गए। ऐसे में वह जानना चाहते हैं कि नया ऋण किस आवेदन के आधार पर स्वीकृत हुआ, किस अधिकारी ने मंजूरी दी, ऋण की वास्तविक राशि कितनी थी और उसे पुराने ऋण खाते में किस आधार पर समायोजित किया गया। उन्होंने नए ऋण से संबंधित आवेदन पत्र, ऋण खाता संख्या, केवाईसी दस्तावेज, स्वीकृति पत्र, भुगतान/समायोजन विवरण तथा हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।

सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग

    शिकायतकर्ता ने बैंक रिकॉर्ड के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि बैंक परिसर के सीसीटीवी कैमरों में संबंधित अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो तो उसे सुरक्षित कराकर जांच में शामिल किया जाए। साथ ही ऋण स्वीकृति से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जाए कि आवेदन कब तैयार हुआ, किस स्तर से स्वीकृत हुआ और ऋण की धनराशि किस खाते में तथा किस उद्देश्य से स्थानांतरित या समायोजित की गई।

मोबाइल रखने के आरोप की भी हो जांच

           वृद्ध किसान ने मोबाइल फोन अपने पास रखे जाने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में दबाव, अनुचित प्रभाव अथवा अन्य किसी अनियमित तरीके से हस्ताक्षर कराने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने जांच पूरी होने तक विवादित नए ऋण की वसूली अथवा किसी प्रतिकूल कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

अब बैंक रिकॉर्ड खोलेगा राज या शिकायत रह जाएगी कागजों में?

      फिलहाल किसान द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बैंक अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन पुराना केसीसी ऋण, उसके बीच नया ऋण दर्ज होना और घर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप ने बैंकिंग प्रक्रिया में ग्राहक की सहमति और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर हैं कि बैंक के ऋण आवेदन, डिजिटल लॉग, स्वीकृति रिकॉर्ड, खाते का लेन-देन, केवाईसी दस्तावेज और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज इस पूरे मामले में क्या तस्वीर सामने लाते हैं।यदि चाहें तो इसे मैं और तीखे “ब्रेकिंग न्यूज़/झरोखा” अंदाज में 2–3 लाइन की हेडिंग और उपशीर्षक के साथ भी बना सकता हूँ।

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