अम्बेडकर नगर: संपूर्ण समाधान दिवस में समाधान कम, शिकायतों का बोझ ज्यादा
- पांच तहसीलों में 403 फरियाद, मौके पर सिर्फ 38 का निस्तारण—365 शिकायतें फिर ‘निर्धारित समयसीमा’ के भरोसे
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता । जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के सरकारी आंकड़े ही बता रहे हैं कि जिले में फरियादियों को मौके पर कितना समाधान मिल पाया। पांचों तहसीलों के आंकड़ों को जोड़ें तो कुल 403 शिकायतें पहुंचीं, लेकिन इनमें से महज 38 शिकायतों का मौके पर निस्तारण हो सका। यानी कुल शिकायतों का लगभग 9.43 प्रतिशत ही तत्काल समाधान की श्रेणी में आया, जबकि 365 शिकायतें यानी करीब 90.57 प्रतिशत शिकायतें संबंधित विभागों के हवाले कर दी गईं। कागज पर अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याएं सुनीं, संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश भी दिए, लेकिन आंकड़ों का आईना कुछ अलग ही तस्वीर दिखा रहा है।
जलालपुर में 88 फरियाद, समाधान सिर्फ 6 का
तहसील जलालपुर में जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित हुआ। यहां कुल 88 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें सिर्फ 6 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। गणित के हिसाब से जलालपुर में तत्काल निस्तारण की दर लगभग 6.82 प्रतिशत रही। यानी 82 शिकायतकर्ता अपनी समस्या का समाधान लेकर घर नहीं लौट सके, बल्कि उनकी शिकायतें संबंधित विभागों के पास भेज दी गईं।
अकबरपुर में 107 शिकायतें, समाधान 6 का
तहसील अकबरपुर में कुल 107 शिकायतें आईं। इनमें से सिर्फ 6 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। यहां 101 शिकायतें लंबित रह गईं। अर्थात अकबरपुर में तत्काल समाधान की हिस्सेदारी लगभग 5.61 प्रतिशत रही।
टांडा में 46 में से 6 का समाधान
तहसील टांडा में कुल 46 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 6 शिकायतों का मौके पर निस्तारण हुआ, जबकि 40 शिकायतें संबंधित अधिकारियों के पास चली गईं। यहां मौके पर निस्तारण का प्रतिशत करीब 13.04 प्रतिशत रहा।
भीटी में 55 शिकायतें, समाधान 5 का
तहसील भीटी में कुल 55 शिकायतें प्राप्त हुईं। मौके पर सिर्फ 5 शिकायतों का निस्तारण हुआ और 50 शिकायतें लंबित रहीं। तत्काल समाधान की दर करीब 9.09 प्रतिशत रही।
आलापुर में 107 शिकायतें, 15 का मौके पर निस्तारण
तहसील आलापुर में कुल 107 शिकायतें पहुंचीं। इनमें 15 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि 92 शिकायतें संबंधित विभागों को भेजी गईं। यहां मौके पर निस्तारण की दर करीब 14.02 प्रतिशत रही।
अब पूरे जिले का ‘संपूर्ण समाधान’ वाला गणित देखिए
तहसील| कुल शिकायतें| मौके पर निस्तारित| लंबित/भेजी गईं| निस्तारण प्रतिशत
- जलालपुर| 88| 6| 82| 6.82%
- अकबरपुर| 107| 6| 101| 5.61%
- टांडा| 46| 6| 40| 13.04%
- भीटी| 55| 5| 50| 9.09%
- आलापुर| 107| 15| 92| 14.02%
- कुल| 403| 38| 365| 9.43%
एक तरफ 403 फरियाद, दूसरी तरफ सिर्फ 38 तत्काल समाधान
पांचों तहसीलों का आंकड़ा जोड़ने पर तस्वीर साफ है—403 शिकायतों में से 38 का मौके पर समाधान, जबकि 365 शिकायतें तत्काल समाधान से बाहर रहीं। यानी हर 100 शिकायतकर्ताओं में औसतन 9 से 10 शिकायतकर्ताओं को ही मौके पर राहत मिली, जबकि लगभग 91 शिकायतकर्ताओं की शिकायतें आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गईं। अब सवाल यह नहीं कि अधिकारियों ने फरियाद सुनी या नहीं—सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक शिकायतें सुनी गईं और निर्देश भी दिए गए। असली सवाल यह है कि ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में मौके पर समाधान का प्रतिशत इतना कम क्यों रहा?
समयबद्ध निस्तारण’ अब अगली परीक्षा
प्रशासन ने शेष शिकायतों को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि स्थलीय जांच वाले मामलों में अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर जांच करें और लापरवाही मिलने पर जवाबदेही तय की जाएगी।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि 365 शिकायतों में से कितनी शिकायतों का वास्तविक समाधान होता है और कितनी सिर्फ कागजी निस्तारण की फाइल में पहुंचती हैं। क्योंकि समाधान दिवस की असली सफलता कुर्सियों पर बैठकर शिकायत सुनने से नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में खत्म होने से तय होगी।
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